
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों के परिसरों और भवनों की छतों के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन बिजली के तारों को हटाने अथवा स्थानांतरित करने के मामले में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में विभाग ने प्रदेश के 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों से बिजली लाइनों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
यह कार्रवाई हरियाणा मानव अधिकार आयोग में लंबित मामले की आगामी सुनवाई को देखते हुए की गई है। माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक कार्यालय की ओर से संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में सरकारी स्कूलों के ऊपर या परिसर से गुजर रही हाईटेंशन लाइनों की ताजा स्थिति स्पष्ट टिप्पणी के साथ उपलब्ध कराएं।
बिजली निगमों से मांगी गई स्थिति
शिक्षा विभाग ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के साथ-साथ हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि किन स्कूलों से हाईटेंशन लाइन हटाई जा चुकी है, किन स्थानों पर लाइन को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है और किन मामलों में अभी कार्रवाई लंबित है। विभाग यह भी जानना चाहता है कि लंबित मामलों में देरी का कारण क्या है और उन्हें पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
सरकारी स्कूलों की इमारतों और परिसरों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनें विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ के लिए गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय रही हैं। खासकर स्कूल की छतों के ऊपर से गुजरने वाले तारों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्कूलों में बच्चे नियमित रूप से कक्षाओं के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं। ऐसे में बिजली के तारों की सुरक्षित दूरी और उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। विभाग का ताजा कदम इसी सुरक्षा चिंता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
मानव अधिकार आयोग में लंबित है मामला
स्कूलों से हाईटेंशन तार हटाने का मामला हरियाणा मानव अधिकार आयोग के समक्ष लंबित है। आगामी सुनवाई से पहले शिक्षा विभाग अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संबंधित जिलों से वास्तविक और अद्यतन जानकारी उपलब्ध हो।
इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को बिजली निगमों के साथ समन्वय कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में केवल सामान्य जानकारी देने के बजाय स्कूलवार स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है।
स्कूलवार कार्रवाई की जानकारी जरूरी
शिक्षा निदेशालय की ओर से मांगी गई जानकारी में यह स्पष्ट किया जाना है कि संबंधित स्कूल में हाईटेंशन लाइन की स्थिति क्या है। यदि लाइन हटाई जा चुकी है तो कब हटाई गई, यदि स्थानांतरण का काम चल रहा है तो उसकी वर्तमान प्रगति क्या है और यदि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो उसके पीछे क्या कारण है।
इससे विभाग को प्रदेशभर में ऐसे स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। साथ ही मानव अधिकार आयोग के समक्ष भी कार्रवाई की प्रगति से संबंधित तथ्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
बिजली निगमों के साथ समन्वय पर जोर
हाईटेंशन लाइनों को हटाना या स्थानांतरित करना शिक्षा विभाग के स्तर पर अकेले संभव नहीं है। इसके लिए बिजली वितरण और प्रसारण निगमों की तकनीकी तथा प्रशासनिक भूमिका अहम है। इसी वजह से जिला शिक्षा अधिकारियों को संबंधित बिजली निगमों के साथ तालमेल स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग चाहता है कि स्कूलों से संबंधित सुरक्षा मामलों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण काम लंबित न रहे। विशेष रूप से बच्चों से जुड़े मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई गई है।
लंबित मामलों पर बढ़ सकता है दबाव
जिन स्कूलों में अभी भी हाईटेंशन लाइनें मौजूद हैं, वहां कार्रवाई की गति बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से दबाव बढ़ सकता है। ताजा रिपोर्ट मिलने के बाद यह पता चल सकेगा कि कितने स्कूलों में समस्या का समाधान हो चुका है और कितने स्कूल अभी भी जोखिम की स्थिति में हैं।
यदि किसी स्कूल में लाइन हटाने या स्थानांतरित करने का काम लंबे समय से लंबित है तो संबंधित विभागों से उसकी वजह और समयसीमा भी पूछी जा सकती है।
सुनवाई से पहले रिपोर्ट महत्वपूर्ण
मानव अधिकार आयोग में मामले की आगामी सुनवाई से पहले मांगी गई रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि आयोग के सामने स्कूलों से हाईटेंशन तार हटाने की कार्रवाई की वास्तविक और अद्यतन स्थिति रखी जा सके।
इसके लिए जिला स्तर पर उपलब्ध जानकारी को अपडेट करने और बिजली निगमों से प्राप्त आंकड़ों का मिलान करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता
विद्यालय शिक्षा निदेशालय के इस कदम से स्पष्ट है कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हाईटेंशन तारों को हटाने या सुरक्षित दूरी पर स्थानांतरित करने से संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
फिलहाल 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के कितने सरकारी स्कूलों से हाईटेंशन लाइनें हटाई जा चुकी हैं और कितने स्कूलों में कार्रवाई अभी बाकी है। मानव अधिकार आयोग की आगामी सुनवाई से पहले शिक्षा विभाग की सक्रियता से उम्मीद है कि लंबित मामलों में कार्रवाई को गति मिलेगी और स्कूल परिसरों को बिजली लाइनों से जुड़े संभावित खतरे से सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।





