
पंचकूला: आवारा कुत्तों के आतंक की एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने चार साल के मासूम बेटे को बचा लिया। कुत्तों के झुंड ने मां और बच्चे पर अचानक हमला कर दिया। बेटे को बचाने के लिए मां ने उसे सीने से लगाए रखा और खुद कुत्तों के हमले का शिकार हो गई। इस दौरान महिला के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उसकी हालत को देखते हुए उसे पंचकूला नागरिक अस्पताल से चंडीगढ़ स्थित जीएमसीएच सेक्टर-32 रेफर किया गया।
यह घटना रविवार सुबह पंचकूला के सेक्टर-12 इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक, महिला घरेलू सहायिका के रूप में काम करती है और वह रैली गांव से अपने काम के लिए जा रही थी। उस समय उसका चार साल का बेटा उसके साथ था। महिला बच्चे को गोद में लेकर सड़क से गुजर रही थी, तभी अचानक कई आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्तों का झुंड महिला और बच्चे के आसपास घूमने लगा और देखते ही देखते उन्होंने हमला कर दिया। कुत्ते बच्चे को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मां ने तुरंत अपने बेटे को सीने से चिपका लिया। उसने बच्चे को बचाने के लिए खुद को कुत्तों के सामने कर दिया।
कुत्तों ने महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई बार हमला किया। महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन उसने अपने बच्चे को नहीं छोड़ा। मां की हिम्मत और सूझबूझ के कारण बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बच गया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर महिला और बच्चे को कुत्तों से बचाया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
महिला को पहले पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 रेफर कर दिया। महिला के शरीर पर गहरे घाव होने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में आवारा कुत्तों को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि शहर में लगातार आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से हर साल आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम जैसी योजनाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीन पर हालात अलग नजर आ रहे हैं। शहर के कई इलाकों में अब भी बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं और लोगों को खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और कुत्तों के टीकाकरण व नसबंदी अभियान को प्रभावी तरीके से चलाने की जरूरत बताई गई है।
इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। वहीं, मां की बहादुरी की हर तरफ सराहना हो रही है। अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए खुद चोट सहने वाली इस मां ने ममता और साहस की मिसाल पेश की है। उसकी हिम्मत के कारण चार साल के मासूम की जान बच सकी।





