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Sonipat: भाई को बचाने के लिए लिया कर्ज, परिवार उजड़ा

Admindelhi1
26 Feb 2026 6:36 PM IST
Sonipat: भाई को बचाने के लिए लिया कर्ज, परिवार उजड़ा
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"चतरा हादसे में अजय ने खोया अपना पूरा परिवार"

सोनीपत: सोचा था भाई को दिल्ली पहुंचा देंगे तो जान बच जाएगी। हमने हर दरवाजा खटखटाया, कर्ज लिया, लोगों से हाथ जोड़े लेकिन रात को फोन आया कि प्लेन क्रैश हो गया। यह कहते-कहते अजय की आवाज भर्रा जाती है। झारखंड के चतरा में सोमवार रात हुए एयर एम्बुलैंस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में मारे जाने वालों में झुलसे होटल संचालक संजय, उसकी पत्नी अर्चना, रिश्तेदार ध्रुव, मैडीकल स्टाफ और क्रू मैंबर शामिल थे। सोनीपत के मॉडल टाऊन स्थित बी.ई.ओ. कार्यालय में पियन की नौकरी करने वाले अजय ने बताया कि मृतक संजय उसके भाई थे। उसने इस हादसे में अपने परिवार के 3 सदस्यों को खो दिया।

सोनीपत के प्रेम नगर की एक गली में रहने वाले अजय के घर में मातम पसरा हुआ है। छोटा-सा किराए का मकान, सीमित आय और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वह अपने बड़े भाई संजय को बचाने की जद्दोजहद में लगे थे। अजय बताते हैं कि उनका परिवार मूल रूप से झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा का रहने वाला है। संजय वहां छोटा-सा होटल चलाते थे। पिछले सोमवार होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि संजय करीब 60 प्रतिशत तक झुलस गए। पहले तो स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि हालत गंभीर है। फिर तय किया कि दिल्ली ले जाएंगे। किसी ने बताया कि वहां बेहतर इलाज मिलेगा। उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में बात की और एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की लेकिन उन्हें आभास भी नहीं था कि यह एयर एम्बुलैंस उसके परिजनों के लिए जलता ताबूत बन जाएगा।

कर्ज लेकर की थी एयर एम्बुलैंस की व्यवस्थाः अजय के अनुसार एयर एम्बुलैंस का खर्च लाखों में था। उनकी तनख्वाह इतनी नहीं कि इतना बड़ा खर्च उठा सके। रिश्तेदारों, दोस्तों, जान-पहचान वालों से पैसे उधार लिए। कुछ लोगों ने मदद की, कुछ से व्याज पर रकम ली। बस एक ही सोच थी कि भाई बच जाए लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। उड़ान के कुछ समय बाद ही चतरा में एयर एम्बुलैंस क्रैश हो गई। देर रात फोन आया तो पहले यकीन ही नहीं हुआ। सोचा कोई अफवाह होगी, पर जब प्रशासन से पुष्टि हुई तो पैरों तले जमीन खिसक गई।

अब कर्ज भी सिर पर, परिवार भी टूट गया: हादसे में सिर्फ संजय ही नहीं, उनकी पत्नी अर्चना और रिश्तेदार ध्रुव भी चल बसे। अजय बताते हैं कि अब बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी उन पर आ गई है। भाई को बचाने निकले थे, पूरा परिवार ही खत्म हो गया। अब जो कर्ज लिया है वह कैसे चुकाऊं ? नौकरी छोटी है, घर किराए का है। समझ नहीं आ रहा आगे क्या होगा, अजय ने नम आंखों से अपना दर्द बयां किया। सोनीपत में अजय के घर पर शोक जताने वालों का तांता लगा है। पड़ोसी ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन परिवार गहरे सदमे में है।

सरकार से मदद की उम्मीदः अजय ने सरकार से आर्थिक सहायता की अपील की है। उनका कहना है कि यदि कुछ सहयोग मिल जाए तो कर्ज का बोझ हल्का हो सकेगा और बच्चों की पढ़ाई व भविष्य संभाला जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वह गरीब लोग हैं, बस मेहनत से जीवन चल रहा था। यह हादसा हमारे लिए सब कछ छीन ले गया।

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