हरियाणा

सोहना: 5 कक्षाओं के लिए सिर्फ 4 कमरे, शिक्षकों के पद भी खाली... बदहाल है जखोपुर का 'मॉडल' स्कूल

Saba Naaz
24 July 2026 5:26 PM IST
सोहना: 5 कक्षाओं के लिए सिर्फ 4 कमरे, शिक्षकों के पद भी खाली... बदहाल है जखोपुर का मॉडल स्कूल
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हरियाणा: सरकार भले ही सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों जैसी आधुनिक सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन सोहना के वार्ड-9 स्थित जखोपुर का 'राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय' इन दावों की पोल खोल रहा है। महज 500 गज के दायरे में फैले इस दशकों पुराने स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्र मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कागजों में तो यह 'मॉडल स्कूल' है, लेकिन जमीनी हकीकत में यहाँ कमरों से लेकर शिक्षकों तक का भारी अकाल बना हुआ है।

स्कूल में बुनियादी ढाँचे की स्थिति बेहद दयनीय है। यहाँ पांच अलग-अलग कक्षाओं के संचालन के लिए मात्र चार ही कमरे मौजूद हैं। स्थान की भारी कमी के कारण कई बार दो कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बिठाकर या समायोजन करके पढ़ाना पड़ता है। इसके अलावा, हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के दो-दो सेक्शन होने के बावजूद स्कूल इंचार्ज समेत केवल चार शिक्षक ही पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि चार शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्टाफ की कमी के चलते अध्यापकों पर काम का अतिरिक्त बोझ है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

मानसून के दिनों में स्कूल की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने से बारिश का पानी स्कूल के मुख्य द्वार, परिसर और कक्षाओं तक में भर जाता है। छोटे-छोटे मासूम बच्चों को इसी गंदे और भरे हुए पानी से होकर कक्षाओं तक जाना पड़ता है, जिससे फिसलकर चोटिल होने का खतरा लगातार बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा भी शिक्षा विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन यहाँ हर मोर्चे पर लापरवाही दिखती है।

स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों के अनुसार, लगभग चार वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक जनसभा में इस स्कूल को आठवीं तक अपग्रेड करने की घोषणा की थी। हालाँकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो स्कूल का विस्तार हुआ और न ही नया भवन बन सका। विभाग ने सिर्फ पुराने भवन की मरम्मत कराकर औपचारिकता पूरी कर ली है। स्कूल इंचार्ज बिमलेश कुमारी का कहना है कि रिक्त पदों को भरने और सुविधाओं के विस्तार के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे जा चुके हैं। जब तक नया भवन, अतिरिक्त कमरे और पूरा स्टाफ नहीं मिलेगा, तब तक बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

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