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Sirsa: शीशपाल कंबोज ने राष्ट्रीय गीत की महत्ता बताई

Admindelhi1
8 Nov 2025 10:18 AM IST
Sirsa: शीशपाल कंबोज ने राष्ट्रीय गीत की महत्ता बताई
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सिरसा: राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूर्ण होने पर सिरसा जिले के शिक्षण संस्थाओं में शुक्रवार को कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लाइव टेलीकास्ट किया गया और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी।

रानियां के कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शीशपाल कंबोज ने कहा कि वंदे मातरम् एक गीत के शब्द नहीं बल्कि ऐसा मंत्र है जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरो कर रखता है। आजादी की लड़ाई में हर देशभक्त और क्रांतिकारी की जुंबा पर वंदे मातरम् था। आजादी के बाद भी वंदे मातरम् देशवासियों में नए जोश का संचार करता है। यह मंत्र मां भारती के प्रति समर्पण, श्रद्धा और एकता का प्रतिक है। इस अवसर पर तहसीलदार शुभम शर्मा, नायब तहसीलदार लोकेश शर्मा, विद्यालय की प्राचार्या इंद्रजीत कौर सैनी, भाजपा पूर्ण चंद सैन, कमल बंसल, मार्केट कमेटी के चेयरमैन ललित पोपली आदि मौजूद रहे।

इसी प्रकार जेसीडी मेमोरियल कॉलेज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी विद्यार्थियों और कॉलेज स्टाफ ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जय प्रकाश ने अपने संदेश में कहा कि वंदे मातरम भारतीय संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रभावना का अद्वितीय प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह गीत हर भारतीय के मन में एकता, समर्पण और देशप्रेम की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपने इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोडऩे का सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे इन प्रेरक अवसरों से सीख लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं, साथ ही उन्होंने कॉलेज प्रशासन की ओर से ऐसे सांस्कृतिक व राष्ट्रीय कार्यक्रमों को निरंतर प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

उधर, राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिरसा के प्रांगण में भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विद्यार्थियों में इसकी महता एवं देशभक्ति की भावना को प्रतिपादित किया गया। विद्यालय के प्रवक्ता चमन भारतीय ने विद्यार्थियों को विस्तार से इस गीत के बारे में जानकारी प्रदान की और बताया कि आज से 150 वर्ष पहले इसी दिन अर्थात 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना की और 1882 में उन्होंने अपने उपन्यास आनंद मठ में इसको स्थान दिया 1896 में रविंद्र नाथ टैगोर ने पहली बार राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में इस गीत को गाया था। 1905 बंग भंग आंदोलन में यह गीत देशभक्ति का नारा बन गया था। इस गीत ने एकता, समता का भाव जागृत किया।

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