
सिरसा की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने केंद्र सरकार से 'नेशनल रिवर इंटरलिंकिंग प्रोग्राम' के तहत प्रस्तावित यमुना-घग्गर लिंक प्रोजेक्ट को शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट हरियाणा में बार-बार आने वाली बाढ़, सिंचाई की कमी और पीने के पानी के संकट का लंबे समय तक चलने वाला समाधान हो सकता है।
नई दिल्ली के हरियाणा भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित 'जल जीवन मिशन' और हरियाणा के जल संसाधनों पर समीक्षा बैठक में बोलते हुए, शैलजा ने कहा कि राज्य के 14 जिलों में अभी भी पीने के पानी की कमी है, जबकि किसान नहर से सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा के कारण संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'जल जीवन मिशन' की सफलता का आकलन बिछाई गई पाइपलाइनों की संख्या से नहीं, बल्कि हर घर में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति से किया जाना चाहिए। उन्होंने पानी की कमी वाले जिलों में पेयजल स्रोतों, नहर के बुनियादी ढांचे, भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता का केंद्र और हरियाणा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आकलन करने की मांग की।
हरियाणा के "जल विरोधाभास" (water paradox) का जिक्र करते हुए शैलजा ने कहा कि हर साल मानसून का भारी मात्रा में पानी राज्य से बाहर बह जाता है, जिससे अक्सर बाढ़ आती है, जबकि सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जैसे जिलों में पानी की भारी कमी बनी रहती है।





