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झज्जर के स्कूल में पढ़ाई संग घुड़सवारी की ट्रेनिंग, बनी प्रदेश की मिसाल

Kavita2
2 Aug 2026 1:34 PM IST
झज्जर के स्कूल में पढ़ाई संग घुड़सवारी की ट्रेनिंग, बनी प्रदेश की मिसाल
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झज्जर। शिक्षा के साथ खेल और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने की दिशा में झज्जर जिले का राजकीय माध्यमिक विद्यालय, निमाना एक नई पहचान बना रहा है। यह विद्यालय न केवल नियमित पढ़ाई के लिए जाना जा रहा है, बल्कि यहां विद्यार्थियों को घुड़सवारी जैसे अनोखे खेल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सरकारी स्कूलों को लेकर बनी पारंपरिक सोच को बदलते हुए यह विद्यालय पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनकर उभर रहा है।

विद्यालय में बच्चों को पाठ्यक्रम की शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक क्षमता, आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल विकसित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। घुड़सवारी प्रशिक्षण इसी पहल का हिस्सा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, साहस और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।

पढ़ाई के साथ खेलों पर विशेष जोर

राजकीय माध्यमिक विद्यालय, निमाना में शिक्षा को केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए खेल और अन्य गतिविधियां भी जरूरी हैं।

इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को घुड़सवारी का प्रशिक्षण देने की शुरुआत की गई। घुड़सवारी एक ऐसा खेल है, जो बच्चों के शारीरिक संतुलन के साथ मानसिक मजबूती को भी बढ़ाता है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे नई चुनौतियों का सामना करना सीखते हैं।

विद्यालय के इस प्रयास ने इसे अन्य सरकारी विद्यालयों से अलग पहचान दिलाई है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी अब पढ़ाई के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर पा रहे हैं।

बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास

घुड़सवारी प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। शुरुआत में कई बच्चों के लिए घोड़े पर बैठना एक नया और चुनौतीपूर्ण अनुभव था, लेकिन नियमित अभ्यास से उन्होंने इसे सीखना शुरू कर दिया।

विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि घुड़सवारी से बच्चों के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ रही है।

छात्रों के लिए यह अनुभव केवल एक खेल गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन कौशल सीखने का माध्यम बन रहा है। वे समय प्रबंधन, जिम्मेदारी और धैर्य जैसे गुणों को भी विकसित कर रहे हैं।

सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर

आमतौर पर सरकारी विद्यालयों को सीमित संसाधनों और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन निमाना का यह विद्यालय इस सोच को बदलने का काम कर रहा है।

विद्यालय में आधुनिक सोच के साथ बच्चों को बेहतर अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा के साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देकर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और बच्चों को बेहतर माहौल देने में मदद कर सकती है।

अभिभावकों में भी बढ़ा भरोसा

विद्यालय की इस पहल से अभिभावकों में भी सकारात्मक संदेश गया है। उनका मानना है कि बच्चों को एक ही स्थान पर पढ़ाई के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों के अवसर मिलना बड़ी उपलब्धि है।

अभिभावकों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को मोबाइल और अन्य गैर-रचनात्मक गतिविधियों से दूर रखकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती हैं।

प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रहा विद्यालय

निमाना का राजकीय माध्यमिक विद्यालय अब केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन रहा है। घुड़सवारी जैसे खेल को सरकारी विद्यालय के स्तर पर शामिल करना एक अलग और सराहनीय पहल मानी जा रही है।

विद्यालय का लक्ष्य है कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ ऐसे अवसर दिए जाएं, जिससे वे अपनी छिपी प्रतिभा को पहचान सकें और जीवन में आगे बढ़ सकें।

झज्जर का यह सरकारी विद्यालय यह साबित कर रहा है कि यदि इच्छाशक्ति और सही प्रयास हों तो सरकारी संस्थान भी नई मिसाल कायम कर सकते हैं। शिक्षा और खेल के इस मेल से यहां के विद्यार्थी न केवल बेहतर छात्र बन रहे हैं, बल्कि आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

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