
हरियाणा : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार अब गांव-गांव में सांझी डेयरी खोलने की योजना पर काम कर रही है। इन डेयरियों का संचालन स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इससे जहां पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत प्रत्येक गांव में सांझी डेयरी स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डेयरी संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी जाएगी, जिससे वे सीधे तौर पर इस व्यवसाय से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पहले से ही बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अब उन्हें डेयरी व्यवसाय से जोड़कर आय के स्थायी साधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। अधिकारियों का मानना है कि गांवों में सामूहिक रूप से डेयरी संचालन से दूध उत्पादन में वृद्धि होगी और पशुपालकों को भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
सांझी डेयरी योजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसका संचालन पूरी तरह से समूह की महिलाओं द्वारा किया जाएगा। महिलाएं दूध संग्रह, प्रबंधन, बिक्री और अन्य संबंधित कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इससे उन्हें न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि निर्णय लेने और आर्थिक प्रबंधन का अनुभव भी प्राप्त होगा।
योजना के तहत सांझी डेयरी खोलने वाले स्वयं सहायता समूहों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। डेयरी डेवलपमेंट विभाग के माध्यम से समूहों को प्रति लीटर दूध पर सात रुपये का अतिरिक्त शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इस आर्थिक सहायता से महिलाओं को डेयरी संचालन में मदद मिलेगी और उनका मुनाफा भी बढ़ेगा।
अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। वर्तमान में कई किसान और पशुपालक व्यक्तिगत स्तर पर दूध उत्पादन करते हैं, लेकिन उन्हें कई बार उचित बाजार और बेहतर मूल्य नहीं मिल पाता। सांझी डेयरी के माध्यम से दूध को एकत्रित कर व्यवस्थित तरीके से बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे पशुपालकों को भी लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पशुपालन से जुड़ी गतिविधियां गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकती हैं। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से परिवार की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण महिलाओं ने भी इस योजना को लेकर उत्साह जताया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि यदि उन्हें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बाजार की सुविधा मिलती है तो वे डेयरी व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला सकती हैं। इससे उन्हें घर के कामकाज के साथ-साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
सरकार की ओर से डेयरी संचालन से पहले महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इसमें पशुओं की देखभाल, दूध की गुणवत्ता बनाए रखना, डेयरी प्रबंधन और बाजार व्यवस्था से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इससे समूह की महिलाएं आधुनिक तरीके से डेयरी का संचालन कर सकेंगी।
सांझी डेयरी योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे गांवों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
फिलहाल योजना को लागू करने के लिए संबंधित विभागों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। गांवों में स्वयं सहायता समूहों की पहचान, प्रशिक्षण और डेयरी स्थापना की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए और प्रदेश में दूध उत्पादन को नई गति दी जाए।





