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Hisar सीनियर INLD नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने सरकार के महीने भर चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को हल करने के बजाय, प्रचार के लिए जनता के पैसे और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सिंह ने आरोप लगाया कि जनसेवा के तौर पर पेश की जा रही गतिविधियां असल में राजनीतिक प्रचार का जरिया बनती जा रही हैं। उन्होंने इस अभियान से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन में सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों के लिए अलग-अलग स्तरों पर सरकारी मशीनरी को लगाया जा रहा है और सरकारी संस्थानों से कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने रैलियों, प्रचार सामग्री और बड़े कट-आउट के लिए जनता के पैसे और संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए, जबकि सरकार गंभीर आर्थिक और रोजगार संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा, "ऐसी गतिविधियों पर खर्च किए जा रहे संसाधनों का इस्तेमाल उन परिवारों को राहत देने के लिए किया जाना चाहिए जो बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।" सिंह ने आरोप लगाया कि इन आयोजनों से बेरोजगारी, महंगाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे जैसे मुद्दों से ध्यान भी हटाया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार को बड़े-बड़े प्रचार कार्यक्रमों के बजाय स्थायी रोजगार पैदा करने, सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने और ठोस विकास करने पर ध्यान देना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि इन आयोजनों के लिए जुटाए जा रहे संसाधनों का इस्तेमाल रोजगार पैदा करने और बेरोजगार परिवारों की आजीविका में मदद के लिए किया जा सकता है। उन्होंने जनता के पैसे के इस्तेमाल में जवाबदेही की भी मांग की। सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दीये जलाने और ताली बजाने जैसे प्रतीकात्मक कार्यों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से बेरोजगार युवाओं की आजीविका से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होंगी। उन्होंने बढ़ती कीमतों समेत परिवारों के सामने आ रही आर्थिक मुश्किलों का भी जिक्र किया और 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात पर चिंता जताई।
उन्होंने होर्मुज और लाल सागर के रास्तों से जुड़ी भू-राजनीतिक स्थिति का भी जिक्र किया और कहा कि इन इलाकों में रुकावट से सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
सिंह ने कहा कि सरकार को दिखावटी कार्यक्रमों के बजाय रोजगार पैदा करने, गरीबी कम करने, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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