हरियाणा

हिसार में जवान से 7 लाख की ठगी, लुटेरी दुल्हन फरार

Rajeshwari Nishad
17 Oct 2026 2:00 PM IST
हिसार में जवान से 7 लाख की ठगी, लुटेरी दुल्हन फरार
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हिसार। हरियाणा के हिसार में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जहां शादी का भरोसा देकर सेना के एक जवान को करीब सात लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। हिसार कैंट में तैनात तमिलनाडु निवासी 32 वर्षीय जवान धनराज की पहचान एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से सारान्या नाम की युवती से हुई थी। शादी के इरादे से शुरू हुई बातचीत कथित तौर पर साइबर ठगी में बदल गई और जवान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर
ऑनलाइन
वैवाहिक प्लेटफॉर्म पर पहचान बनाने वाले लोगों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।
ऑनलाइन वैवाहिक वेबसाइटों के जरिए जीवनसाथी की तलाश करना आज आम हो गया है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अलग-अलग शहरों और राज्यों में रहने वाले लोग एक-दूसरे से संपर्क करते हैं। हालांकि, साइबर अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। शादी का वादा, भावनात्मक बातचीत और भविष्य के सुनहरे सपने दिखाकर रुपये ऐंठना साइबर ठगी का एक तरीका बन चुका है।
वैवाहिक वेबसाइट के जरिए हुई पहचान
जानकारी के अनुसार, हिसार कैंट में तैनात 32 वर्षीय सेना के जवान धनराज मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उनकी पहचान वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से सारान्या नाम की युवती से हुई थी। वैवाहिक वेबसाइट पर संपर्क होने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। ऐसे प्लेटफॉर्म पर संपर्क करने वाले लोग आमतौर पर शादी और पारिवारिक जीवन को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा करते हैं, जिससे धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति विश्वास बनने लगता है।
इस मामले में भी शादी के भरोसे से जुड़ी बातचीत के बीच जवान के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में जवान को करीब सात लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, ठगी की रकम कितनी किस्तों में भेजी गई, रुपये भेजने के लिए क्या कारण बताए गए और आरोपी ने किस तरह जवान को अपने विश्वास में लिया, इन सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी की पुष्टि आवश्यक है।
सात लाख रुपये गंवाने से जुड़ा मामला
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर पीड़ित के साथ लगातार संपर्क बनाए रखते हैं। शुरुआत में बातचीत सामान्य होती है, लेकिन धीरे-धीरे भरोसा बढ़ने के बाद रुपये की मांग की जा सकती है। कई मामलों में शादी की तैयारियों, पारिवारिक परेशानी, आपातकालीन जरूरत या अन्य बहानों का सहारा लिया जाता है। हालांकि, धनराज के मामले में ठगी के लिए किस विशेष तरीके का इस्तेमाल किया गया, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
इस घटना में जवान को सात लाख रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी रकम गंवाना किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर आर्थिक झटका हो सकता है। ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले लोग कई बार भावनात्मक रूप से भी प्रभावित होते हैं, क्योंकि उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ किसी पर किए गए भरोसे के टूटने का भी सामना करना पड़ता है।
ऑनलाइन शादी के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ वैवाहिक वेबसाइटों और मैट्रिमोनियल ऐप का इस्तेमाल बढ़ा है। इन प्लेटफॉर्म के जरिए लोग अपने लिए उपयुक्त जीवनसाथी तलाशते हैं। लेकिन कुछ साइबर अपराधी फर्जी पहचान बनाकर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जो शादी के लिए गंभीर होते हैं और सामने वाले पर भरोसा कर लेते हैं।
कई बार आरोपी अपनी पहचान, नौकरी, परिवार या रहने के स्थान को लेकर गलत जानकारी देते हैं। इसके बाद भावनात्मक बातचीत के जरिए पीड़ित के साथ नजदीकी बढ़ाई जाती है। जब भरोसा कायम हो जाता है, तो अलग-अलग बहानों से रुपये मांगे जा सकते हैं। इसलिए किसी भी ऑनलाइन परिचय को वास्तविक मानने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि वैवाहिक वेबसाइट पर किसी व्यक्ति से संपर्क होने के बाद जल्दबाजी में आर्थिक लेन-देन नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति शादी का भरोसा देकर रुपये मांगता है, तो उसकी बातों की जांच किए बिना पैसा भेजने से बचना चाहिए।
सेना के जवानों सहित सभी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
धनराज के साथ हुई कथित ठगी का मामला यह बताता है कि साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं। ऐसे अपराधों से बचने के लिए केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन संपर्क के दौरान सावधानी बरतना भी जरूरी है।
वैवाहिक वेबसाइट पर किसी व्यक्ति से बातचीत शुरू होने के बाद उसकी पहचान, पारिवारिक जानकारी और अन्य दावों की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या संवेदनशील दस्तावेज साझा नहीं करने चाहिए। वीडियो कॉल या सोशल मीडिया प्रोफाइल पर मौजूद जानकारी को भी पहचान का अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक दबाव बनाकर तत्काल रुपये भेजने के लिए कहता है, तो सावधान हो जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सलाह लेना मददगार हो सकता है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचित करना चाहिए। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है। इसके अलावा, आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
शिकायत करते समय बैंक लेन-देन की रसीद, संबंधित मोबाइल नंबर, चैट, प्रोफाइल की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। समय पर सूचना देने से संबंधित एजेंसियों को लेन-देन की जांच और संभावित कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
जांच और कार्रवाई से जुड़ी जानकारी का इंतजार
हिसार कैंट में तैनात सेना के जवान धनराज से शादी का भरोसा देकर करीब सात लाख रुपये की कथित ठगी का मामला ऑनलाइन वैवाहिक परिचय के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत को सामने लाता है। इस मामले में युवती की वास्तविक पहचान, रुपये हासिल करने के तरीके और संभावित अन्य लोगों की भूमिका जैसे पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल, घटना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर लोगों के लिए यही संदेश है कि ऑनलाइन रिश्तों में भरोसा करने से पहले पहचान की जांच जरूर करें और शादी के नाम पर किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन करने में जल्दबाजी न करें।
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