हरियाणा

आरआरटीएस प्रोजेक्ट अपडेट: दिल्ली-करनाल कॉरिडोर पर बढ़ी रफ्तार, सोनीपत में शुरू हुई सॉइल टेस्टिंग

Saba Naaz
24 July 2026 8:22 PM IST
आरआरटीएस प्रोजेक्ट अपडेट: दिल्ली-करनाल कॉरिडोर पर बढ़ी रफ्तार, सोनीपत में शुरू हुई सॉइल टेस्टिंग
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सोनीपत: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और हाई-स्पीड बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली से करनाल तक बनने वाले महत्वाकांक्षी नमो भारत कॉरिडोर (RRTS) का काम अब तेजी से धरातल पर उतरता नजर आ रहा है। दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र के बाद अब भू-तकनीकी सर्वे (Geotechnical Survey) करने वाली विशेषज्ञ टीम सोनीपत पहुंच चुकी है। टीम पिछले चार दिनों से कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में लगातार सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी परीक्षण) का काम कर रही है, जो इस बात का संकेत है कि 136 किलोमीटर लंबा यह मेगा प्रोजेक्ट अब अपने सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक चरण में प्रवेश कर चुका है।

क्यों जरूरी है सॉइल टेस्टिंग?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर या बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण से पहले जमीन की भार वहन क्षमता (Load-Bearing Capacity) और भूगर्भीय संरचना की बारीकी से जांच करना अनिवार्य होता है। मिट्टी की इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही इंजीनियर यह तय करते हैं कि एलिवेटेड ट्रैक के पिलर जमीन में कितनी गहराई तक गाड़े जाएंगे और मेट्रो-तर्ज पर बनने वाले स्टेशनों की नींव किस प्रकार की होगी।

हरियाणा सरकार से इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद अब सॉइल टेस्टिंग की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। जैसे ही यह रिपोर्ट तैयार होगी, रूट पर बनने वाले सभी स्टेशनों और पिलर्स के फाइनल स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

सोनीपत और आसपास के इलाकों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

इस नमो भारत कॉरिडोर के मूर्त रूप लेने से सबसे अधिक आर्थिक, सामाजिक और आवागमन से जुड़ी राहत सोनीपत और उसके आसपास के ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों को मिलेगी। हर रोज सोनीपत से दिल्ली और एनसीआर के अन्य शहरों में नौकरी करने वाले पेशेवर, व्यापारी, उद्यमी और छात्र-छात्राएं रोजाना सफर करते हैं। इस हाई-स्पीड रेल के शुरू होने से उन्हें एनएच-44 के भीषण ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेनों की भारी भीड़-भाड़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

दिल्ली और सोनीपत के बीच की दूरी तय करने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी, जिससे लोग आसानी से कम समय में आना-जाना कर सकेंगे। इसके अलावा, कॉरिडोर के दायरे में आने वाले प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी इलाके जैसे कुंडली, नाथूपुर, मुरथल और गन्नौर में रियल एस्टेट सेक्टर, नए व्यावसायिक केंद्रों और औद्योगीकरण को एक नया और बड़ा उछाल मिलने की पूरी उम्मीद है।

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