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बारिश से मिली राहत, लेकिन प्रदेश के 21 जिलों में अब भी बरकरार है वर्षा घाटा

Kavita2
5 Aug 2026 11:52 AM IST
बारिश से मिली राहत, लेकिन प्रदेश के 21 जिलों में अब भी बरकरार है वर्षा घाटा
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हरियाणा : प्रदेश में मंगलवार को हुई झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी है। लंबे इंतजार के बाद कई इलाकों में हुई अच्छी वर्षा से जहां आम जनजीवन को राहत मिली है, वहीं खरीफ फसलों को लेकर किसानों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। हालांकि, मानसून के दो महीने बीतने के बाद भी प्रदेश का वर्षा घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अभी भी 21 जिले सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को प्रदेश के 16 जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस भरी गर्मी से कुछ राहत मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में हुई वर्षा से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है, क्योंकि मानसून की शुरुआत में कई क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हो पाई थी। कम वर्षा के कारण बोवनी और फसलों की शुरुआती बढ़त को लेकर किसानों में चिंता बनी हुई थी। अब हुई बारिश से फसलों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश की स्थिति समान नहीं रही है। कई जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के दो महीने पूरे होने के बाद भी 21 जिले वर्षा के सामान्य स्तर से पीछे हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रहा है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कुछ जिलों में अभी भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार है।

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां कृषि पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश होती है तो वर्षा घाटा कम हो सकता है और फसलों की स्थिति में सुधार आएगा।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, मानसून सिस्टम की सक्रियता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

प्रशासन और कृषि विभाग भी बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फसलों की स्थिति और जल उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। जरूरत पड़ने पर किसानों को आवश्यक सलाह भी जारी की जाएगी।

जल संसाधनों के लिए भी यह बारिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बारिश होने से तालाब, छोटे बांध और जल स्रोतों में पानी का स्तर बढ़ने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को भी मदद मिल सकती है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के शेष समय में अच्छी बारिश होने पर प्रदेश में मौजूदा वर्षा घाटे की भरपाई संभव है। हालांकि, इसके लिए लगातार सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों की जरूरत होगी।

राज्य के कई हिस्सों में मंगलवार की बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया। लोगों ने राहत महसूस की और किसानों के चेहरे पर भी उम्मीद दिखाई दी। लेकिन जिन जिलों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है, वहां किसानों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई है।

फिलहाल प्रदेश में मानसून की स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। जहां कुछ जिलों में बारिश ने राहत दी है, वहीं 21 जिलों में सामान्य वर्षा की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश ही प्रदेश के वर्षा घाटे की स्थिति को तय करेगी।

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