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मिड-डे मील में बदले नियुक्ति नियम

Kavita2
22 Sept 2026 4:41 PM IST
मिड-डे मील में बदले नियुक्ति नियम
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चंडीगढ़। राजकीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत अब दिव्यांग व्यक्तियों को कुक-कम-हेल्पर के पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सुरक्षा और इस काम की प्रकृति को आधार बताते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि कुक-कम-हेल्पर का काम समयबद्ध होने के साथ खाना पकाने और रसोई से जुड़ी गतिविधियों वाला है, इसलिए नियुक्ति के दौरान कार्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।

राजकीय विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को मिड-डे मील योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराया जाता है। स्कूलों में भोजन तैयार करने और बच्चों तक पहुंचाने में कुक-कम-हेल्पर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

जिला अधिकारियों को भेजा गया पत्र

मौलिक शिक्षा निदेशालय ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर नई नियुक्तियों के संबंध में निर्देश दिए हैं। इसमें कुक-कम-हेल्पर के काम की प्रकृति और उससे जुड़े सुरक्षा पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

निदेशालय के अनुसार यह काम निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना होता है। बच्चों के लिए भोजन तैयार करने से लेकर उसे समय पर परोसने तक कई जिम्मेदारियां कुक-कम-हेल्पर को निभानी पड़ती हैं।

इसके चलते संबंधित पद पर नियुक्ति के समय व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता और रसोई में सुरक्षित तरीके से जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति को महत्वपूर्ण बताया गया है।

समय पर तैयार करना होता है बच्चों का भोजन

स्कूलों में मिड-डे मील के लिए भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होती है। स्कूल के निर्धारित समय के अनुसार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना होता है।

कुक-कम-हेल्पर को खाना बनाने से पहले सामग्री तैयार करने, भोजन पकाने, रसोई की व्यवस्था संभालने और निर्धारित समय पर बच्चों को खाना उपलब्ध कराने जैसे कई काम करने पड़ते हैं।

इसके अलावा रसोई में गर्म बर्तन, चूल्हा या अन्य खाना पकाने के उपकरण इस्तेमाल होते हैं। इसी वजह से निदेशालय ने सुरक्षा संबंधी पहलुओं को भी अपने निर्णय का आधार बताया है।

पहली से आठवीं तक के बच्चों को मिलता है भोजन

सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्कूल में भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ स्कूलों में उनकी उपस्थिति और पोषण स्तर को बेहतर करना है।

इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्कूलों में कुक-कम-हेल्पर लगाए जाते हैं। भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इन्हीं कर्मचारियों के पास होती है।

स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए तय समय में खाना तैयार करना होता है, इसलिए यह काम शारीरिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहता है।

सुरक्षा कारणों का दिया गया हवाला

निर्देश में सुरक्षा को फैसले के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। स्कूल की रसोई में खाना पकाने के दौरान आग, गर्म पानी, तेल, भारी बर्तन और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसी स्थिति में दुर्घटना की आशंका को कम करने के लिए नियुक्ति के समय काम की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

हालांकि दिव्यांगता कई प्रकार की होती है और प्रत्येक व्यक्ति की कार्य क्षमता अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में इस निर्देश का वास्तविक दायरा और किन श्रेणियों की दिव्यांगता पर यह लागू होगा, यह विस्तृत विभागीय दिशा-निर्देशों से अधिक स्पष्ट होगा।

कुक-कम-हेल्पर की जिम्मेदारी अहम

मिड-डे मील व्यवस्था में कुक-कम-हेल्पर केवल भोजन पकाने तक सीमित नहीं रहते। कई स्कूलों में उन्हें भोजन सामग्री को व्यवस्थित करने, रसोई की साफ-सफाई बनाए रखने और बच्चों को भोजन वितरण में सहयोग जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।

बच्चों की संख्या अधिक होने पर निर्धारित समय में भोजन तैयार करना बड़ी जिम्मेदारी होती है। स्कूल के टाइम टेबल के अनुसार खाना तैयार और वितरित करना जरूरी होता है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।

निदेशालय ने इसी समयबद्ध प्रकृति को अपने पत्र में रेखांकित किया है।

नई नियुक्तियों पर लागू होगा निर्देश

निदेशालय के निर्देश में कहा गया है कि अब दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर की नियुक्ति नहीं की जाएगी। इसके बाद नई भर्ती या नियुक्ति प्रक्रिया में जिला और स्कूल स्तर पर अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।

हालांकि पहले से कार्यरत दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर को लेकर क्या व्यवस्था होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में विभाग के विस्तृत आदेश या स्पष्टीकरण से स्थिति साफ हो सकती है।

इसलिए मौजूदा कर्मचारियों पर निर्देश के प्रभाव को लेकर अलग से आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

जिलों में निर्देश का करना होगा पालन

मौलिक शिक्षा निदेशालय से पत्र मिलने के बाद जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे स्कूल स्तर पर नई नियुक्तियों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

स्कूलों में कुक-कम-हेल्पर की जरूरत विद्यार्थियों की संख्या और योजना के निर्धारित मानकों के अनुसार होती है। रिक्त पदों पर नियुक्ति करते समय अब नए निर्देश को भी ध्यान में रखा जाएगा।

विभाग की ओर से जारी पत्र का उद्देश्य स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था को समय पर और सुरक्षित तरीके से संचालित करना बताया गया है।

फैसले पर उठ सकते हैं सवाल

दिव्यांग व्यक्तियों को एक पूरी श्रेणी के पद पर नियुक्त नहीं करने का निर्देश समान अवसर और रोजगार के अधिकार के नजरिए से सवाल भी खड़े कर सकता है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 में दिव्यांग व्यक्तियों के साथ रोजगार में भेदभाव नहीं करने और उचित सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधान हैं।

ऐसे में यह महत्वपूर्ण होगा कि विभाग का आदेश किन कानूनी प्रावधानों और किस प्रकार के कार्यात्मक आकलन पर आधारित है। अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की कार्य क्षमता समान नहीं होती।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सुरक्षा और कुक-कम-हेल्पर के समयबद्ध काम की प्रकृति को देखते हुए नई नियुक्तियों को लेकर यह निर्देश जारी किया है। जिला अधिकारियों को अब स्कूलों में होने वाली नियुक्तियों के दौरान इसका पालन सुनिश्चित करना होगा।

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