हरियाणा
यमुनानगर महापंचायत में राकेश टिकैत का किसानों के मुद्दों पर बड़ा बयान
Ratna Netam
4 Oct 2026 9:15 PM IST

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यमुनानगर : हरियाणा के यमुनानगर में रविवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) की किसान महापंचायत में धान खरीद और गन्ने के दाम समेत किसानों से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठे। महापंचायत को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला करेगा। यह महापंचायत ऐसे समय हुई है जब राज्य की मंडियों में धान की खरीद को लेकर किसानों की परेशानियां सामने आ रही हैं।
किसानों की समस्याओं को लेकर महापंचायत
यमुनानगर में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। किसानों के प्रमुख मुद्दों में धान की खरीद में आ रही दिक्कतें और गन्ने के उचित मूल्य की मांग शामिल रही। इससे पहले भी यमुनानगर में किसान संगठनों ने धान बेचने में आ रही परेशानियों को लेकर प्रदर्शन किया था।रिपोर्टों के अनुसार, कुछ किसानों को फसल के क्षेत्रफल के रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन में अंतर के कारण धान बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इस वजह से मंडियों में खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं।महापंचायत में किसानों की ओर से गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने और धान में नमी की निर्धारित सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत करने जैसी मांगें भी उठाई गईं। इसके अलावा किसानों का कर्ज माफ करने और गेहूं का भाव बढ़ाने की मांग भी सामने आई।
टिकैत बोले- पूरे हरियाणा में किसान परेशान
ANI से बातचीत में राकेश टिकैत ने कहा कि पूरे हरियाणा में किसान मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस हरियाणा को किसान एक समय कृषि व्यवस्था के लिहाज से मजबूत मानते थे, वहां आज किसानों को अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।टिकैत ने कहा कि वह यमुनानगर किसानों की समस्याओं को समझने और उनकी आवाज उठाने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने हरियाणा की पुरानी कृषि व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान भी पहले यहां अपनी फसल बेचने आते थे। साथ ही किसान हरियाणा में सस्ता डीजल और खाद खरीदने के लिए भी आते थे।उन्होंने इसे मौजूदा स्थिति के संदर्भ में दुखद बताया और कहा कि आज हरियाणा के किसानों को ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
धान खरीद का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण
धान की सरकारी खरीद किसानों के लिए खरीफ सीजन का अहम मुद्दा है। फसल तैयार होने के बाद किसान चाहते हैं कि मंडियों में खरीद प्रक्रिया सुचारू रहे और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।यमुनानगर में हाल के दिनों में धान खरीद को लेकर किसानों की परेशानियां सामने आई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज फसल क्षेत्र और भौतिक सत्यापन के क्षेत्रफल में अंतर के कारण कुछ किसानों की खरीद प्रक्रिया अटक गई थी। किसान संगठनों ने प्रशासन से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की थी।ऐसे में महापंचायत में धान खरीद से जुड़े मुद्दे का उठना किसानों की मौजूदा चिंता को दर्शाता है।
गन्ने के भाव पर भी जोर
महापंचायत में गन्ने के मूल्य को लेकर भी किसानों ने अपनी मांग रखी। किसानों की ओर से गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की गई। गन्ने की लागत, खाद, बिजली, डीजल और खेती से जुड़े अन्य खर्च बढ़ने के कारण किसान संगठन लंबे समय से बेहतर कीमत की मांग करते रहे हैं।राकेश टिकैत ने इससे पहले भी गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग उठाई है। सितंबर में उन्होंने कहा था कि बढ़ती लागत और चीनी के दाम को देखते हुए गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए।
SKM के अगले कदम पर नजर
महापंचायत में राकेश टिकैत ने कहा कि अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो संयुक्त किसान मोर्चा आगे की बड़ी कार्रवाई पर फैसला करेगा। इसका मतलब यह है कि मौजूदा मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में किसान संगठनों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।हालांकि, आगे की कार्रवाई का अंतिम फैसला SKM की बैठक और संगठन की रणनीति के आधार पर होगा। फिलहाल किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखा है।
आंदोलन की दिशा पर बढ़ी निगाहें
यमुनानगर में महापंचायत के बाद किसानों के आंदोलन की दिशा को लेकर भी चर्चा बढ़ गई है। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कुछ रिपोर्टों में महापंचायत के बाद पंचकूला-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों के धरने और यातायात प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई है।किसान संगठनों की मांग है कि धान की खरीद में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को जल्द दूर किया जाए और गन्ने के लिए बेहतर मूल्य तय किया जाए। वहीं, संगठन की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल यमुनानगर की महापंचायत ने हरियाणा में किसानों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। धान खरीद की मौजूदा व्यवस्था, गन्ने के दाम और अन्य कृषि मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। किसानों और किसान संगठनों की अगली रणनीति भी इसी प्रतिक्रिया पर निर्भर कर सकती है।
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