
Chandigarh चंडीगढ़। 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का कार्यक्रम घोषित होते ही हरियाणा में राज्यसभा का चुनाव लड़ने के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। अगर दोनों सीटों पर भाजपा के राज्यसभा सदस्य हैं। 90 सीटों वाली विधानसभा में सीटों के संख्या बल के आधार पर इस बार एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी। पिछले दो चुनाव में कांग्रेस सीटों की क्रास वोटिंग व तकनीकी कारणों की वजह से भाजपा समर्थित वैमानिक उम्मीदवार राज्यसभा प्रत्याशी रहे हैं। इनमें सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा शामिल हैं। पिछले इतिहास को देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अगर भाजपा को थोड़ा भी उपचुनाव हुआ तो वह कांग्रेस के हिस्से की दूसरी सीट के लिए अपने समर्थन से कोई वैमानिक उम्मीदवार खड़ा कर सकती है।
16 मार्च को होगा चुनाव
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। इसके लिए उपचुनाव को पांच मार्च तक नामांकन दाखिल करने होंगे। भाजपा के दो राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का कार्यकाल नौ अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिस वजह से यह दोनों सीटें खाली हो रही हैं। भाजपा आखिर तक भी उम्मीदवार को लेकर कोई संकेत नहीं देती। अचानक कोई ऐसा चेहरा चुनाव में उतार दिया जाता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। पिछले चुनाव में पंचकूला की रेखा शर्मा को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने सभी को चौंका दिया था। इस बार भी कोई नया नाम सामने आएगा तो इसमें रानी की बात नहीं होगी।
रेस में कई नाम शामिल
भाजपा के राजनीतिक गलियारों में राज्यसभा के लिए इस समय पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के पूर्व सांसद बेटे कुलदीप बिश्नोई का नाम चर्चा में चल रहा है। पिछली बार भी कुलदीप राज्यसभा में जाने से रह गए थे। पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी राज्यसभा जाने के आवेदकों में शामिल हैं। अंबाला के पूर्व सांसद स्व. रतनलाल कटारिया की धर्मपत्नी बंतो कटारिया और सिरसा की पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल के साथ करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया और पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के साथ पूर्व मंत्री असीम गोयल के नामों की भी चर्चा है। सौतेले राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी की कोशिश दोबारा राज्यसभा में जाने की रहेगी। उनकी बेटी पूर्व सांसद श्रुति चौधरी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री हैं। कांग्रेस में राज्यसभा के टिकट के लिए ज़्यादा मारामारी है, लेकिन किसी को यह उम्मीद नहीं है कि वह उम्मीदवार घोषित होने के बावजूद चुनाव जीत जाएगा। हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान का नाम पार्टी में सबसे ज़्यादा चर्चा में है।
बाहरी नेता मैदान में उतरेंगे
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा. अशोक तंवर का नाम भी लिया जा रहा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अजय माकन को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन क्रास वोटिंग के चलते वह हार गए थे। इस बार भी कांग्रेस किसी बाहरी नेता को हरियाणा के चुनावी रण में उतार सकती है। राजनीतिक गलियारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, प्रवक्ता पवन खेड़ा और बिहार के कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार का नाम भी लिया जा रहा है। राज्यसभा के चुनाव में वही कांग्रेस उम्मीदवार जीतेंगे, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा चाहेंगे।
गोपाल कांडा और सुशील गुप्ता के दोनों हाथों में लड्डू
हरियाणा लोकहित पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। सिरसा के विधायक रह चुके गोपाल कांडा की पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। गोपाल कांडा अंतरिम तौर पर राज्यसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी तैयारी ठीक उसी तरह की है, जिस तरह से सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा भाजपा के सहयोग से चुनाव लड़े हुए राज्यसभा पहुंचे थे। भाजपा ने यदि चाहा तो गोपाल कांडा को भी चुनावी रण में उतारा जा सकता है। गोपाल कांडा की कांग्रेस पहाड़ियों में भी मजबूत पकड़ है और उन्हें पूर्व में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का करीबी माना जाता रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ भी उनके बढ़िया संबंध हैं। इसी तरह आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य डा. सुशील गुप्ता पर भी भाजपा और कांग्रेस दोनों दांव खेल सकते हैं। सुशील गुप्ता के साथ-साथ कांडा पर भी कांग्रेस की निगाह है





