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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हुई बेकार
कैथल। जिले के सरकारी कार्यालय व सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए ज्यादातर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम महज खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। सफाई और देखरेख न होने के अभाव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों में गंदगी जमा है। इस वजह से बारिश के दौरान लाखों लीटर पानी जमीन में जाने की बजाय नालों में बह जाता है। लोगों का आरोप है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की देखरेख करना अफसर भूल गए।
गौरतलब है कि वर्षा जल संचयन या रेन वाटर हार्वेस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें हम वर्षा के जल को जरूरत की चीजों में उपयोग कर सकते हैं। एक निर्धारित स्थान पर हम बारिश का जल जमा कर हम वर्षा जल संचयन कर सकते हैं। इसे करने के कई तरीके हैं। लगातार गिरते जा रहे जलस्तर को देखते हुए सरकार ने सरकारी व अर्द्धशासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद लापरवाही की वजह से ज्यादातर सरकारी सिस्टम फेल नजर आते हैं।
ऐसे में बारिश से मिलने वाला लाखों लीटर पानी जमीन में जाने की बजाय नालों में बह जाता है। इसके कारण नगर का जलस्तर सुधर नहीं पा रहा है। मानसून नजदीक है लेकिन प्रशासन ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों को सुचारू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। कई भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की पाइप टूटकर जमीन पर पड़ी हुई हैं, तो कई जगह पर पानी सहेजने के लिए बनाए गए नालों की ईंटें उखड़ी हुई है। प्रशासन के मुख्य स्थान के सिस्टम की पाइप लाइन बंद पड़ी है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कैसे कामयाब होगा। प्रशासन को इसकी तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
बिजली निगम कार्यालय
बिजली निगम कार्यालय के प्रांगण में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया हुआ है, लेकिन पानी सहेजने वाले नाले की ईटें उखड़ी हुई पड़ी है। दोनों तरफ से नालों में गंदगी जमा हो गई है। पाइप लाइन पूरी तरह से टूटकर जर्जर हो चुकी है। पानी को बचाने के लिए लगाया हुआ यह सिस्टम बिजली निगम भवन में नकारा साबित हो रहा है।
लघु सचिवालय के हार्वेस्टिंग सिस्टम में गंदगी का आलम बना हुआ है। पाइप बंद पड़े हुए हैं। पाइप बंद होने के कारण पानी ऊपर तक आ चुका है। पाइप लाइन कचरे के ढेर से गुजरती हुई टैंक में जा रही है। पाइप की सफाई न होने के कारण बरसात का पानी लघु सचिवालय के पास मैदान में जमा हो रहा है।
नई अनाज मंडी स्थित चौकी का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी खराब पड़ा है। पाइप के आसपास गंदगी की भरमार है। गंदगी के कारण रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तक पानी नहीं पहुंच रहा है। पाइप भी ऊपर से ढकी हुई नहीं है। सिस्टम के आसपास घास फूस व झाड़ियां उगी हुई है। सफाई बदहाल होने के कारण पाइप बंद हो गया है।
सिविल अस्पताल हार्वेस्टिंग सिस्टम भी ठप
सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कक्ष के सहारे लगा वाटर रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बंद पड़ा हुआ है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के दोनों तरफ झाड़ियां खड़ी हुई हैं। पानी जाने के लिए पाइपों में जगह नहीं है। बरसात का पानी सिविल अस्पताल के आसपास खड़ा रहता है। मरीजों को भी आने जाने में परेशानी होती है।
लाखों रुपये खर्च कर लगाएं गए थे सिस्टम
लाखों रुपये खर्च करने के बाद आईटीआई, पीडब्ल्यूडी विभाग, सेक्टर 18 व 19, बस स्टैंड, शिक्षा विभाग, नहरी विभाग व खेल विभाग सहित अन्य सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम प्रशासन की तरफ से लगाए गए थे, लेकिन इनमें से ज्यादातर बंद पड़े हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन केसी पठानिया ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों को सुचारू करने के लिए कार्य शुरू किया हुआ है। अगले एक सप्ताह में सभी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टमों को सुचारू कर दिया जाएगा।
क्या है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के तहत प्रकृति प्रदत्त जल वर्षा को खोदे गए गड्ढों में हार्वेस्टिंग के माध्यम से एकत्र कर भूगर्भ जल रिचार्ज किया जाता है। पहले यह प्रणाली राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में पानी की कमी के चलते कैचमेंट के पानी को संचित करने में प्रयोग की जाती थी। बाद में अन्य इलाकों में भी इस प्रणाली पर जोर दिया और सरकारी व अर्द्धशासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली अनिवार्य कर दी गई।
करीब एक लाख रुपये आता है खर्च
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना में करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। इस प्रणाली में भवन का पूरा पानी एक स्थान पर लाकर पाइप के जरिेये नीचे उतारा जाता है। नीचे भवन के क्षेत्रफल के हिसाब से टैंक बनाया जाता है। उसमें बोरिंग कराई जाती है, ताकि वर्षा का पानी टैंक व बोर के जरिए जमीन के अंदर जा सके। इससे जलस्तर में सुधार होता है।
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