
कैथल। दीपावली के त्योहार को देखते हुए जिले में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब जिला पुलिस के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें भी अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसेंगी। इसके लिए बोर्ड ने दो विशेष जांच टीमों का गठन किया है। ये टीमें जिले के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण कर बिना अनुमति संचालित पटाखा निर्माण इकाइयों की पहचान करेंगी। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, पुलिस भी अवैध पटाखों के कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों में पुलिस ने 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से करीब 3,200 किलोग्राम पटाखे और पटाखों से भरी 870 पेटियां बरामद की गई हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गठित की दो विशेष टीमें
जिले में अवैध पटाखा निर्माण की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विशेष अभियान चलाने की तैयारी की है।
बोर्ड की ओर से दो जांच टीमों का गठन किया गया है, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ये टीमें पटाखों का निर्माण करने वाली इकाइयों की जांच करेंगी और यह पता लगाएंगी कि उनके पास आवश्यक अनुमति तथा सुरक्षा संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
इसके अलावा निर्माण इकाइयों में पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
जिन स्थानों पर बिना अनुमति पटाखे बनाने या नियमों का उल्लंघन करने की पुष्टि होगी, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर कार्रवाई की जा सकेगी।
दो महीने में 21 आरोपियों की गिरफ्तारी
अवैध पटाखों के कारोबार के खिलाफ जिला पुलिस पहले से अभियान चला रही है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, पिछले दो महीनों के दौरान पुलिस ने विभिन्न कार्रवाइयों में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस दौरान करीब 3,200 किलोग्राम पटाखे और पटाखों से भरी 870 पेटियां बरामद की गई हैं।
यह बरामदगी जिले में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर निगरानी की आवश्यकता को सामने लाती है।
हालांकि, इन कार्रवाइयों में दर्ज मामलों की संख्या, आरोपियों की पहचान और जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सक्रियता से ऐसे कारोबार पर निगरानी और बढ़ने की उम्मीद है।
बिना लाइसेंस पटाखे बनाना गंभीर मामला
पटाखों के निर्माण और भंडारण के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
पटाखों में उपयोग होने वाली विस्फोटक सामग्री के कारण निर्माण इकाइयों में आग लगने और विस्फोट होने का खतरा बना रहता है।
इसी वजह से पटाखा उद्योग के लिए लाइसेंस, सुरक्षित भंडारण और अन्य आवश्यक मानक निर्धारित किए गए हैं।
बिना अनुमति संचालित इकाइयों में सुरक्षा उपायों की अनदेखी होने पर वहां काम करने वाले कर्मचारियों के साथ आसपास रहने वाले लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
विशेष रूप से आबादी वाले इलाकों में अवैध पटाखा निर्माण गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
सुरक्षा मानकों की भी होगी जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों के निरीक्षण का उद्देश्य केवल अवैध फैक्ट्रियों की पहचान करना नहीं, बल्कि संबंधित पर्यावरणीय मानकों के पालन की जांच करना भी है।
निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल की स्थिति, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और आवश्यक अनुमतियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित उपयोग और भंडारण से जुड़े पहलुओं के लिए संबंधित लाइसेंसिंग और सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
यदि किसी इकाई में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
दीपावली से पहले बढ़ जाती है पटाखों की मांग
दीपावली के अवसर पर पटाखों की खरीदारी बढ़ने से इनका कारोबार भी तेज हो जाता है।
त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोग आतिशबाजी के लिए विभिन्न प्रकार के पटाखे खरीदते हैं।
इसी मांग का फायदा उठाकर कुछ लोग बिना आवश्यक अनुमति पटाखों का निर्माण, भंडारण या बिक्री करने का प्रयास कर सकते हैं।
ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री का असुरक्षित भंडारण गंभीर दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए त्योहार से पहले निर्माण इकाइयों और भंडारण स्थलों की जांच जरूरी मानी जाती है।
पटाखा फैक्ट्रियों में दुर्घटनाओं का खतरा
पटाखा निर्माण में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थों और विस्फोटक मिश्रणों के कारण अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।
निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन नहीं होने पर आग या विस्फोट जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
ऐसे हादसों में कर्मचारियों के घायल होने के साथ फैक्ट्री परिसर और आसपास की संपत्ति को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इसी कारण पटाखा निर्माण इकाइयों में प्रशिक्षित कर्मचारियों, सुरक्षित कार्यस्थल और निर्धारित मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।
अवैध इकाइयों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकता है।
वायु और ध्वनि प्रदूषण भी चिंता का विषय
पटाखों का निर्माण और उपयोग पर्यावरण संबंधी चिंताओं से भी जुड़ा हुआ है।
पटाखे जलाने पर धुआं और विभिन्न प्रदूषक वातावरण में फैल सकते हैं। इससे विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को परेशानी हो सकती है।
इसके अलावा तेज आवाज वाले पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दायित्व संबंधित पर्यावरणीय मानकों की निगरानी करना है।
ऐसे में पटाखा निर्माण इकाइयों के खिलाफ प्रस्तावित निरीक्षण अभियान को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वय जरूरी
अवैध पटाखों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
पुलिस अवैध निर्माण, भंडारण और बिक्री से संबंधित आपराधिक मामलों में कार्रवाई करती है।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की जांच करता है।
जरूरत पड़ने पर प्रशासन, अग्निशमन विभाग और अन्य सक्षम अधिकारियों की सहायता से भी जांच और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की जा सकती है।
इस प्रकार संयुक्त निगरानी व्यवस्था से अवैध गतिविधियों की पहचान और नियमों को लागू करने में मदद मिल सकती है।
अवैध भंडारण पर भी रखी जाएगी नजर
पटाखों के अवैध निर्माण के साथ इनका असुरक्षित भंडारण भी गंभीर समस्या है।
कई बार पटाखों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना गोदामों, दुकानों या अन्य परिसरों में रखा जा सकता है।
ऐसी जगहों पर आग लगने की स्थिति में बड़े नुकसान की आशंका रहती है।
इसलिए पटाखों का भंडारण केवल निर्धारित अनुमति और सुरक्षा शर्तों के अनुसार होना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान संबंधित विभाग संदिग्ध भंडारण स्थलों के बारे में भी जानकारी जुटा सकते हैं।
हालांकि, वर्तमान अभियान में किन स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विशेष टीमें जांच के दौरान मिलने वाली अनियमितताओं का विवरण संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगी।
यदि किसी फैक्ट्री में पर्यावरणीय नियमों के विरुद्ध गतिविधियां पाई जाती हैं, तो लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अवैध निर्माण या विस्फोटक सामग्री से संबंधित उल्लंघन मिलने पर अन्य सक्षम विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
जिला पुलिस पहले से चल रहे अभियान के तहत संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
त्योहार से पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
दीपावली से पहले अवैध पटाखों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दो टीमों का गठन महत्वपूर्ण कदम है।
पुलिस की ओर से पिछले दो महीनों में 21 आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में पटाखों की बरामदगी की जानकारी दी गई है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती अवैध निर्माण और भंडारण के अन्य संभावित ठिकानों की पहचान करने की है।
आने वाले दिनों में विशेष टीमों के निरीक्षण से यह स्पष्ट होगा कि जिले में कितनी इकाइयां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य अवैध पटाखा कारोबार पर रोक लगाना, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और त्योहार के दौरान संभावित दुर्घटनाओं का खतरा कम करना है।





