
गुरुग्राम। मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात को लेकर बुधवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। वांगचुक से मिलने पहुंचे आम आदमी पार्टी, झामुमो, राजद और समाजवादी पार्टी के कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर रोक दिया। पुलिस द्वारा मुलाकात की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने अस्पताल के बाहर ही धरना शुरू कर दिया और प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई।
जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक स्वास्थ्य कारणों के चलते मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए विपक्षी दलों के सांसद उनका हालचाल जानने और मुलाकात करने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। हालांकि, अस्पताल के मुख्य गेट पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
पुलिस अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि फिलहाल अस्पताल में केवल परिवार के सदस्यों को ही सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति दी गई है। सुरक्षा कारणों और अस्पताल प्रशासन के निर्देशों का हवाला देते हुए अन्य लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इस फैसले के बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध जताते हुए अस्पताल के बाहर बैठकर धरना शुरू कर दिया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मामले पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और विपक्षी नेताओं को एक सामाजिक कार्यकर्ता से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। संजय सिंह ने कहा कि किसी जन आंदोलन या सामाजिक मुद्दे से जुड़े व्यक्ति से मिलने से रोकना उचित नहीं है।
धरने पर बैठे विपक्षी सांसदों ने मांग की कि उन्हें सोनम वांगचुक से मुलाकात की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि वे केवल उनका स्वास्थ्य जानने और समर्थन देने के उद्देश्य से अस्पताल पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें मिलने से रोक रहा है।
मामले को लेकर अस्पताल के बाहर कुछ देर तक राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। पुलिस अधिकारियों ने सांसदों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सोनम वांगचुक लंबे समय से सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में उनसे मिलने से रोकना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
वहीं, पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और मरीज की सुविधा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की निजता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मुलाकात को सीमित किया गया है।
फिलहाल सोनम वांगचुक से मुलाकात को लेकर विवाद जारी है। विपक्षी सांसदों का धरना और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोनम वांगचुक से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।





