हरियाणा

गुरुग्राम जलभराव पर सियासी घमासान

Kavita2
26 Aug 2026 4:24 PM IST
गुरुग्राम जलभराव पर सियासी घमासान
x

गुरुग्राम (हरियाणा)। साइबर सिटी गुरुग्राम में जलभराव की समस्या एक बार फिर राजनीतिक मुद्दा बन गई है। सोमवार को हुई करीब 75 एमएम बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी भर गया और कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात नजर आए। लंबे समय से जलभराव की समस्या से जूझ रहे गुरुग्राम में बारिश के बाद एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और शहर की योजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

हर साल मानसून के दौरान गुरुग्राम में जलभराव की समस्या सामने आती है। इस बार भी भारी बारिश के बाद कई सड़कों, कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों में पानी जमा हो गया। लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर वाहन फंस गए और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

बारिश के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कर पाई है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रभावी योजना नहीं बनाई गई, जिसके कारण हर साल लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए जलभराव के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के दस साल के शासनकाल में बिल्डरों को खुली छूट दी गई, जिसके कारण शहर के प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर बड़े निर्माण हो गए।

भाजपा का आरोप है कि गुरुग्राम में जिन स्थानों से प्राकृतिक रूप से पानी का बहाव होता था, वहां बहुमंजिला आवासीय सोसायटियां और कॉरपोरेट कार्यालयों के लिए कई मंजिला इमारतें बना दी गईं। इसके कारण बारिश का पानी निकलने के रास्ते प्रभावित हुए और अब सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि मौजूदा सरकार शहर की समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नालों की सफाई, नए ड्रेनेज सिस्टम और अन्य योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

गुरुग्राम में जलभराव की समस्या केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर के विकास मॉडल से भी जुड़ा बड़ा मुद्दा है। पिछले कुछ वर्षों में गुरुग्राम में तेजी से शहरीकरण हुआ है। बड़ी संख्या में आवासीय सोसायटियां, कंपनियों के कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बने हैं, लेकिन इसके मुकाबले जल निकासी की व्यवस्था उतनी तेजी से विकसित नहीं हो पाई।

शहर के विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम की भौगोलिक स्थिति और तेजी से हुए निर्माण कार्यों ने जलभराव की समस्या को बढ़ाया है। बारिश के पानी को प्राकृतिक रूप से बहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण कई इलाकों में पानी जमा हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले प्रशासन की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश के बाद फिर वही स्थिति दिखाई देती है। लोगों ने स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि हर साल होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।

प्रशासन की ओर से बारिश के बाद जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए और स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए गए। हालांकि, लोगों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है।

गुरुग्राम की जलभराव समस्या अब केवल नगर निगम या प्रशासनिक चुनौती नहीं रही, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे पर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

आने वाले दिनों में मानसून के दौरान शहर में जल निकासी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल बारिश के बाद उठे राजनीतिक विवाद ने गुरुग्राम के विकास और नियोजन व्यवस्था पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।

Next Story