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PM मोदी बोले- 21वीं सदी होगी हरित रेल परिवहन की

Kavita2
17 July 2026 3:07 PM IST
PM मोदी बोले- 21वीं सदी होगी हरित रेल परिवहन की
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जींद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारतीय रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि है।

जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर शुरू की गई इस अत्याधुनिक ट्रेन को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि भविष्य के परिवहन की दिशा में भारत का महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन में 3,200 हॉर्सपावर का प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक का विकास दुनिया में पिछले सात-आठ वर्षों में तेजी से हुआ है। अभी कुछ ही देश इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और वहां भी यह शुरुआती चरण में है। ऐसे समय में भारत का इस क्षेत्र में आगे बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और वैज्ञानिक प्रगति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि जींद से शुरू हुई हाइड्रोजन ट्रेन भारत में बनी अब तक की सबसे लंबी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन भी है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देगी और भविष्य में रेलवे के ऊर्जा परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकती है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे तकनीक के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि 19वीं सदी भाप के इंजनों का दौर था, जबकि 20वीं सदी में डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेनों ने परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दी। उन्होंने विश्वास जताया कि 21वीं सदी हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों का युग होगी।

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और भारत भी इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। हाइड्रोजन आधारित परिवहन व्यवस्था प्रदूषण कम करने और ऊर्जा के नए विकल्प विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक डीजल ईंधन पर निर्भर नहीं होती। हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक के माध्यम से ट्रेन को ऊर्जा मिलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है। इससे रेलवे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि भविष्य की रेल व्यवस्था के लिए स्वच्छ ऊर्जा तकनीक का परीक्षण और विस्तार करना है। आने वाले समय में ऐसी तकनीकों के माध्यम से रेलवे को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की योजना है।

प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और रेलवे कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नई तकनीकों के विकास और उपयोग में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

कार्यक्रम के दौरान रेलवे के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आधुनिक तकनीक अपनाकर यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।

हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को रेलवे के हरित अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य रेलवे को ऊर्जा दक्ष बनाने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने का है। इस दिशा में हाइड्रोजन तकनीक एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन आने वाले वर्षों में लंबी दूरी और गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इससे उन क्षेत्रों में भी स्वच्छ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी, जहां रेल विद्युतीकरण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

जींद से शुरू हुई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को भारतीय रेलवे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह परियोजना भारत की तकनीकी प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य की परिवहन व्यवस्था की नई दिशा को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और आने वाले समय में भारत हाइड्रोजन आधारित तकनीक के क्षेत्र में और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी ऐसी पहलें देश को विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएंगी।

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