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PGIMS की पहल, हेपेटाइटिस-सी मरीजों को राहत

Kavita2
28 July 2026 12:45 PM IST
PGIMS की पहल, हेपेटाइटिस-सी मरीजों को राहत
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रोहतक : हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें इलाज और विशेषज्ञों की सलाह के लिए बार-बार पीजीआईएमएस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत पूरे हरियाणा के विशेषज्ञ चिकित्सकों को जोड़कर ‘हेपेटाइटिस सी फ्री हरियाणा’ नाम से एक व्हाट्सएप नेटवर्क तैयार किया गया है।

इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में हेपेटाइटिस-सी के मरीजों को समय पर इलाज, सही सलाह और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इस नेटवर्क के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यरत चिकित्सक आपस में जुड़कर मरीजों की स्थिति, जांच रिपोर्ट और उपचार से जुड़ी जानकारी साझा कर सकेंगे।

हेपेटाइटिस-सी एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करती है। लंबे समय तक इसका इलाज न होने पर यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में समय पर बीमारी की पहचान और सही उपचार बेहद जरूरी होता है।

पहले प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को विशेषज्ञ सलाह के लिए रोहतक स्थित PGIMS पहुंचना पड़ता था। कई बार मरीजों को जांच और इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद स्थानीय स्तर पर मौजूद चिकित्सक विशेषज्ञों से सीधे संपर्क कर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करा सकेंगे।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की इस पहल के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक ऐसा नेटवर्क बनाया गया है, जहां मरीजों से जुड़े मामलों पर चर्चा की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक विशेषज्ञों से सलाह लेकर इलाज की दिशा तय कर सकेंगे। इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।

विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि हेपेटाइटिस-सी का इलाज अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और आसान हो गया है। आधुनिक दवाओं के माध्यम से कई मरीजों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए बीमारी की सही पहचान और समय पर उपचार शुरू होना जरूरी है।

‘हेपेटाइटिस सी फ्री हरियाणा’ नेटवर्क प्रदेश में बीमारी के उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल से ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा पहुंचाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस-सी के कई मरीजों को शुरुआत में बीमारी के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि कई बार बीमारी का पता देर से चलता है। जागरूकता और नियमित जांच के माध्यम से बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।

इस नेटवर्क के जरिए चिकित्सकों को भी नई जानकारी और उपचार से जुड़े अपडेट मिलते रहेंगे। विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल बनने से मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

प्रदेश में हेपेटाइटिस-सी को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा संस्थान लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में PGIMS की यह पहल बीमारी की रोकथाम और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है।

चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी बीमारी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हेपेटाइटिस-सी के मामले में भी यही रणनीति अपनाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दी जा सकती है।

मरीजों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें हर छोटी जानकारी या सलाह के लिए बड़े अस्पताल तक आने की आवश्यकता नहीं होगी। स्थानीय चिकित्सक विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उनका उपचार कर सकेंगे और केवल गंभीर मामलों में ही उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की जरूरत पड़ेगी।

PGIMS की इस पहल से न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रदेश में हेपेटाइटिस-सी के मामलों की बेहतर निगरानी और प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का लक्ष्य है कि आपसी सहयोग और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से हरियाणा को हेपेटाइटिस-सी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

‘हेपेटाइटिस सी फ्री हरियाणा’ नेटवर्क स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के उपयोग का एक उदाहरण भी है। व्हाट्सएप जैसे आसान डिजिटल माध्यम के जरिए डॉक्टरों को जोड़कर मरीजों तक विशेषज्ञ सलाह पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में इस पहल के और विस्तार की उम्मीद है।

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