हरियाणा

कूड़ा डालने के विरोध में सड़क पर उतरे लोग, धरना जारी

Admindelhi1
21 Oct 2026 8:30 AM IST
कूड़ा डालने के विरोध में सड़क पर उतरे लोग, धरना जारी
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कूड़ा डालने के विरोध में लोगों का अनिश्चितकालीन धरना जारी

फरीदाबाद: फरीदाबाद में अरावली के हरित और पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में नगर निगम द्वारा कूड़ा डालने और कूड़ा घर बनाने की योजना के विरोध में जन-आक्रोश भडक़ उठा है। फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर स्थित भाखरी के पास स्थानीय निवासियों का बेमियादी धरना लगातार जारी है। इस विरोध प्रदर्शन में भाखरी गांव, सैनिक कॉलोनी और अचीवर सोसाइटी के सैकड़ों ग्रामीण व महिला-पुरुष शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अरावली जैसे संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र में कचरा डालने से पूरे इलाके के पर्यावरण को भारी नुकसान होगा और भूजल दूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराएगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि भाखरी के पास अवैध रूप से कचरा डंप किए जाने का विरोध पिछले एक सप्ताह से चल रहा है। इससे पहले वार्ड-19 के पार्षद जगत सिंह भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। करीब तीन दिन पहले पुलिस ने पार्षद समेत कई प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से बलपूर्वक हटा दिया था, लेकिन इसके बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

लोग दोबारा एकजुट होकर धरना स्थल पर बैठ गए हैं और अरावली में कूड़ा डालने की योजना को पूरी तरह रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। अरावली में कूड़ा घर बनाने के विवाद पर फरीदाबाद नगर निगम और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों के बीच लगातार मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस संवेदनशील मामले में आगे की रणनीति पर दशहरा के बाद बड़ा फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि प्रशासन दोबारा प्रदर्शनकारियों को उठाने की तैयारी में है, जिससे ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखे टकराव की आशंका बनी हुई है। पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ओमवीर सिंह ने बताया कि फिलहाल धरना स्थल से लोगों को हटाने का कोई नया फैसला नहीं लिया गया है और निगम प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

दूसरी तरफ, प्रदर्शनकारी निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अरावली में कचरा डालना पूरी तरह बंद नहीं होता और डंपिंग यार्ड की योजना पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। अब सभी की निगाहें दशहरा के बाद आने वाले प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं।

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