हरियाणा

कैथल अनाज मंडी में धान खरीद ठप, इनेलो का विरोध प्रदर्शन

Kiran
7 Oct 2026 12:58 PM IST
कैथल अनाज मंडी में धान खरीद ठप, इनेलो का विरोध प्रदर्शन
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Kaithal मंगलवार को इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कैथल अनाज मंडी में धान की खरीद न होने और सरकार की धान खरीद व्यवस्था में देरी व कमियों के कारण किसानों को हो रही परेशानियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने, राज्य अध्यक्ष रामपाल माजरा के नेतृत्व में, कैथल मार्केट कमेटी के सचिव को हरियाणा के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन किसानों की दुर्दशा बताई गई जिन्हें अपनी मेहनत से उगाई गई फसल को बहुत कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि सरकारी एजेंसियां ​​पूरे राज्य में धान की हर ढेरी को MSP पर तुरंत खरीदें; सभी अनाज मंडियों में नमी मापने वाले मीटर (मॉइस्चर मीटर) पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों; किसानों के लिए केवल अपने गृह जिले में फसल बेचने और उत्पादन की सीमा (प्रोडक्शन कैप) की शर्त हटाई जाए; कंबाइन मशीनों के संचालन के समय और फसल बेचने के लिए गेट-पास की अनिवार्यता पर लगी रोक हटाई जाए; खरीदी गई फसल को जल्दी उठाया जाए ताकि जमाव (बैकलॉग) खत्म हो सके; और अनाज मंडियों में भीड़ कम करने के उपाय किए जाएं। माजरा ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद बहुत धीमी होने के कारण राज्य भर की अनाज मंडियों में धान और बाजरा की फसल बिना बिके पड़ी है। किसानों को अपनी फसल खुले आसमान के नीचे रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे फसल खराब होने का डर है।
उन्होंने बताया कि सरकार घोषित MSP (जो 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय है) पर फसल नहीं खरीद रही है, जबकि निजी व्यापारी और बिचौलिए नमी ज्यादा होने का बहाना बनाकर 300-400 रुपये की कटौती के बाद फसल को 2,100-2,200 रुपये में खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडियों में नमी मापने वाले मीटर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थे। माजरा ने 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल, गेट-पास सिस्टम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म में तकनीकी खराबी का भी जिक्र किया, जिसके कारण फसल के रजिस्ट्रेशन और अनाज मंडियों में प्रवेश में काफी देरी हो रही थी। उन्होंने कहा, "किसानों को सिर्फ़ अपने ज़िले की मंडी में ही फ़सल बेचने की पाबंदी है, भले ही पड़ोसी ज़िले की मंडी पास और ज़्यादा सुविधाजनक हो। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है और समय भी बर्बाद होता है।" उन्होंने आगे कहा कि अच्छी पैदावार के बावजूद सरकार ने प्रति एकड़ उत्पादन की एक अव्यावहारिक सीमा तय कर दी है। उन्होंने कहा, "इस सीमा को हटा दिया जाना चाहिए।"
सरकार ने कंबाइन हार्वेस्टर चलाने का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच तय किया है। उन्होंने इस पाबंदी को बहुत अव्यावहारिक बताया, क्योंकि किसानों को अगली फ़सल के लिए खेत तैयार करने के लिए चौबीसों घंटे कटाई करनी पड़ती है। खरीदी गई फ़सल को उठाने में देरी के कारण भारी भीड़ जमा हो गई है; राज्य की अनाज मंडियों में 2.5 लाख टन से ज़्यादा धान आ चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ़ 35,000 टन ही उठाया गया है। धान की खेती वाले 22 लाख एकड़ में से लगभग 7.59 लाख एकड़ ज़मीन का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। मजरा ने कहा, "हम गवर्नर से अपील करते हैं कि वे तुरंत दखल दें और राज्य सरकार को सख़्त निर्देश जारी करें ताकि किसानों को उनकी फ़सल का सही दाम मिल सके और अनाज मंडियों में कुप्रबंधन की समस्या हल हो सके।"
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