
फरीदाबाद। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम जनजीवन के साथ शिक्षण संस्थानों पर भी पड़ने लगा है। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में 24 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण कई स्कूलों ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को छुट्टी घोषित कर दी है। जानकारी के अनुसार, शहर के 10 से अधिक स्कूलों ने अभिभावकों को मोबाइल संदेश भेजकर स्कूल बंद रखने की सूचना दी है। लगातार बिजली नहीं आने से स्कूलों में पढ़ाई, पेयजल आपूर्ति और दूसरी आवश्यक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं, बिजली संकट से शहर के कई इलाकों में लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बिजली संकट के चलते स्कूलों में छुट्टी का ऐलान
फरीदाबाद में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। लगातार बिजली नहीं मिलने से शिक्षण संस्थानों के संचालन पर भी असर पड़ा है। स्कूल प्रबंधनों ने बच्चों की सुविधा और आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को छुट्टी करने का फैसला लिया है।
अभिभावकों को मोबाइल संदेश के माध्यम से स्कूल बंद रखने की जानकारी दी गई है। अचानक छुट्टी घोषित होने से कई अभिभावकों को अपने दैनिक कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है।
स्कूलों में बिजली की अनुपलब्धता के कारण पंखे, पेयजल की मोटर, कंप्यूटर और दूसरी जरूरी सुविधाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से नियमित कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, छुट्टी घोषित करने वाले सभी स्कूलों की आधिकारिक सूची अभी उपलब्ध नहीं है।
24 घंटे से अधिक समय से कई इलाकों में बिजली गुल
फरीदाबाद में बिजली संकट बुधवार रात से गहराना शुरू हो गया था। बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद कई क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित हुई। जिन इलाकों में तकनीकी खराबी आई, वहां कर्मचारियों की अनुपलब्धता के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हुआ।
शहर के एनआईटी क्षेत्र, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, जनता कॉलोनी, एयरफोर्स रोड, सेक्टर-56, सेक्टर-21डी, सेक्टर-46, चावला कॉलोनी और अन्य क्षेत्रों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं।
लगातार बिजली नहीं मिलने के कारण घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब देने लगे हैं। इससे लोगों को मोबाइल चार्ज करने से लेकर घरेलू कामकाज तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निजीकरण के विरोध में तीन दिन की हड़ताल
बिजली कर्मचारियों ने हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है।
कर्मचारी गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस निर्णय से सरकारी बिजली वितरण निगम के हित प्रभावित हो सकते हैं। उनका तर्क है कि बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने और लाइन लॉस कम करने के लिए पहले ही भारी निवेश किया जा चुका है।
संगठनों ने सरकार से निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस संबंधी फैसले को वापस लेने की मांग की है।
पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा गंभीर असर
बिजली संकट का असर केवल स्कूलों और घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
बिजली नहीं आने से पानी की मोटर नहीं चल पा रही हैं। इससे घरों की टंकियों में पानी भरना मुश्किल हो गया है। कुछ स्थानों पर लोगों को पीने के पानी के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
शहर में लगे कुछ वाटर एटीएम भी बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण बंद हो गए हैं। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
बिजली और पानी की समस्या से परेशान लोगों ने कुछ क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन भी किया। फरीदाबाद के न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप क्षेत्र में स्थानीय निवासियों ने बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी कामकाज प्रभावित
फरीदाबाद देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में छोटे और बड़े उद्योग संचालित होते हैं। ऐसे में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
उद्योगों में मशीनों के संचालन, उत्पादन और जरूरी तकनीकी कार्यों के लिए बिजली बेहद आवश्यक है। आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कई इकाइयों को वैकल्पिक बिजली व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है।
लगातार बिजली कटौती से उत्पादन लागत बढ़ने और निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी तरह बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी बिजली संकट के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सरकार ने कर्मचारियों से की हड़ताल खत्म करने की अपील
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली कर्मचारियों से जनहित को देखते हुए हड़ताल पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आवश्यक सेवा है और इसका सीधा संबंध अस्पतालों, उद्योगों, कृषि, व्यापार तथा आम लोगों की दैनिक जरूरतों से है।
सरकार की ओर से आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने और बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने की बात कही गई है।
वहीं, राज्य सरकार ने निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के नियामकीय फैसले को चुनौती देने की भी बात कही है।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता, पढ़ाई प्रभावित
स्कूलों में अचानक छुट्टी घोषित होने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। जिन परिवारों में माता-पिता दोनों कामकाजी हैं, उनके सामने बच्चों की देखभाल की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
यदि बिजली संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो स्कूलों की नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल प्रबंधनों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
अभिभावकों के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे स्कूलों से मिलने वाली आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें, ताकि बच्चों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
बिजली बहाली पर टिकी लोगों की निगाहें
फरीदाबाद में बिजली संकट ने स्पष्ट कर दिया है कि लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित होने से शहर की सामान्य गतिविधियां किस तरह प्रभावित हो सकती हैं।
स्कूलों में छुट्टी, जलापूर्ति में रुकावट, औद्योगिक गतिविधियों पर असर और लोगों के विरोध प्रदर्शन ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।
फिलहाल शहरवासियों की निगाहें बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच समाधान निकलने पर टिकी हैं। हड़ताल 24 अक्टूबर तक घोषित है, लेकिन बिजली आपूर्ति पूरी तरह कब सामान्य होगी, इसकी निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।





