शोध की गुणवत्ता के लिए मौलिकता और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी

हिसार: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विभाग की ओर से गुरुवार को विश्वविद्यालय सभागार के सेमिनार हॉल-2 में ‘शोध लेखन एवं शोध कार्य में एआई उपकरणों का नैतिक उपयोग’ विषय पर विस्तार व्याख्यान आयोजित किया गया। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में शोध कार्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल, शैक्षणिक ईमानदारी और मौलिकता के महत्व पर विचार रखे।
शोधार्थियों की जवाबदेही का विकल्प नहीं एआई
प्रो. पंकज शर्मा ने कहा कि एआई उपकरण शोध लेखन में भाषा सुधारने, विचारों को व्यवस्थित करने और संबंधित साहित्य की खोज में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि, ये वैज्ञानिक सोच, स्वतंत्र विश्लेषण और शोधार्थी की जवाबदेही का स्थान नहीं ले सकते। उन्होंने शोधार्थियों को स्रोतों का उचित उल्लेख करने, साहित्यिक चोरी से बचने तथा एआई उपकरणों का जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ उपयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने शोध लेखन में स्पष्टता और मौलिकता बनाए रखने के साथ निर्धारित शोध पद्धतियों और शैक्षणिक मानकों का पालन करने पर भी जोर दिया। व्याख्यान के दौरान संकाय सदस्यों और शोधार्थियों ने विषय में रुचि दिखाई तथा प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी की।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका सिंगला ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संकाय सदस्यों ने मुख्य वक्ता प्रो. पंकज शर्मा को स्मृति चिह्न और पटका भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. साक्षी जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. तमन्ना, डॉ. आस्था, आरती, विभाग के अन्य संकाय सदस्य और शोधार्थी उपस्थित रहे।





