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Hariyana हरियाणा: कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में महिला छात्राओं को भेजे गए अश्लील संदेशों की गंभीर घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह घटना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के नारे की वास्तविकता पर सवाल खड़ा करती है और इस नारे का अब कोई अस्तित्व नहीं बचा है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के तीन प्रोफेसरों द्वारा महिला छात्रों को अश्लील और अपमानजनक मैसेज भेजे गए, जो न केवल छात्राओं की गरिमा के खिलाफ हैं बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की विश्वसनीयता को भी ध्वस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि विश्वविद्यालयों में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कांग्रेस सांसद ने कहा, “हम अपनी बेटियों को यूनिवर्सिटी में किस तरह का माहौल दे रहे हैं? ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थान महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। हरियाणा हमेशा महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शीर्ष तीन राज्यों में आता रहा है, इसलिए इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है। हुड्डा ने मांग की कि इस मामले में तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और दोषी प्रोफेसरों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन को सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इस मामले ने राज्य में महिला सुरक्षा और विश्वविद्यालयों में आचार संहिता की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों की ओर से इस प्रकार की हरकतें हों, तो यह केवल छात्राओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की प्रतिष्ठा के लिए खतरा है। हुड्डा ने केंद्रीय और राज्य सरकार से अपील की कि वे इस मामले पर सख्त निगरानी रखें और सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालयों में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को कायम रखना समय की आवश्यकता है।
कांग्रेस सांसद के बयान के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और हरियाणा पुलिस भी इस मामले की जांच में जुट गए हैं। उन्होंने बताया कि दोषियों की पहचान कर उन्हें तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी से हटाने और उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस घटना ने पूरे राज्य में महिला सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में नैतिकता के महत्व पर बहस शुरू कर दी है। यह मामला यह भी याद दिलाता है कि न केवल सामाजिक जागरूकता बल्कि कड़े कानूनी और प्रशासनिक कदम ही महिलाओं के अधिकार और सम्मान की रक्षा कर सकते हैं।
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