
गुरुग्राम: साइबर सिटी गुरुग्राम में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन-सीएंडडी) मलबे के बेहतर प्रबंधन और निस्तारण के लिए नगर निगम ने नई कार्ययोजना तैयार की है। शहर में बढ़ते निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे के लिए जल्द ही एक और सीएंडडी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा।
नगर निगम की नई योजना का उद्देश्य शहर में फैलने वाले निर्माण मलबे की समस्या को नियंत्रित करना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है। इसके तहत सीएंडडी वेस्ट के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को उठाने और उसके निस्तारण की व्यवस्था अलग-अलग माध्यमों से की जाती है। अब नगर निगम इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए घरों और अन्य स्थानों से सीएंडडी वेस्ट के संग्रहण तथा उसके निस्तारण के लिए एक संयुक्त टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को निर्माण मलबा हटवाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों से संपर्क नहीं करना पड़ेगा। एक ही एजेंसी संग्रहण से लेकर प्रोसेसिंग तक की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और मलबे के अवैध निस्तारण पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में निर्माण गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। नए भवनों, सड़कों, व्यावसायिक परिसरों और अन्य परियोजनाओं के कारण बड़ी मात्रा में सीएंडडी वेस्ट निकलता है। यदि इसका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए तो यह शहर की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
नगर निगम का मानना है कि सीएंडडी वेस्ट को कचरा समझने के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। प्रोसेसिंग प्लांट में मलबे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर दोबारा उपयोग योग्य सामग्री तैयार की जाती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होता है और निर्माण क्षेत्र में पुनर्चक्रित सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।
नया सीएंडडी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने से शहर की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे अधिक मात्रा में निर्माण मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेगा। नगर निगम को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सड़कों, खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से फेंके जाने वाले मलबे की समस्या में कमी आएगी।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि निर्माण मलबा फेंकने वालों पर पहले भी कार्रवाई की जाती रही है। लेकिन स्थायी समाधान के लिए जरूरी है कि लोगों को मलबा जमा कराने की आसान और प्रभावी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसी उद्देश्य से संग्रहण और निस्तारण की प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
शहर के पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण मलबे का सही प्रबंधन शहरी विकास के लिए बेहद जरूरी है। बढ़ते शहरीकरण के बीच सीएंडडी वेस्ट की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से इसके पुनर्चक्रण की व्यवस्था न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के लिए टिकाऊ विकास का रास्ता भी तैयार करेगी।
नगर निगम की योजना में नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोगों से अपील की जाएगी कि वे निर्माण या मरम्मत कार्यों से निकलने वाले मलबे को खुले स्थानों पर न फेंकें, बल्कि निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से उसका निस्तारण कराएं।
नई कार्ययोजना के तहत नगर निगम निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी में है, ताकि सीएंडडी वेस्ट के अवैध डंपिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
गुरुग्राम में तेजी से हो रहे विकास और बढ़ती आबादी को देखते हुए सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन एक बड़ी जरूरत बन गया है। नगर निगम की यह पहल शहर को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब सबकी नजर नगर निगम की ओर से जारी होने वाले संयुक्त टेंडर और नए प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना पर है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद साइबर सिटी में निर्माण मलबे के निस्तारण की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकेगी।





