हरियाणा

ग्रीन ट्रांसपोर्ट की नई शुरुआत, पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सफर कर रोमांचित हुए यात्री

nidhi
20 July 2026 7:55 AM IST
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की नई शुरुआत, पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सफर कर रोमांचित हुए यात्री
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न धुआं, न शोर... देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में सफर कर यात्रियों ने कहा- 'ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं मिला'

HARYANA: भारत स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि यात्रा के दौरान न डीजल इंजन जैसा धुआं दिखाई दिया और न ही तेज शोर सुनाई दिया। कई यात्रियों ने इसे "भविष्य की रेल यात्रा" बताते हुए कहा कि ऐसा शांत और आरामदायक अनुभव उन्हें पहले कभी नहीं मिला।

हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेनें पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का उदाहरण मानी जाती हैं। इनका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाना और रेल परिवहन को अधिक टिकाऊ बनाना है।
यात्रियों ने क्या कहा?
पहली यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के चलने के दौरान सामान्य डीजल इंजनों की तुलना में कंपन और शोर काफी कम महसूस हुआ।
यात्रियों के अनुसार—
सफर बेहद शांत और आरामदायक रहा।
धुएं की समस्या बिल्कुल नहीं थी।
ट्रेन का संचालन काफी स्मूथ महसूस हुआ।
अंदर का वातावरण अधिक स्वच्छ और आरामदायक लगा।
यात्रा के दौरान आधुनिक तकनीक का अनुभव हुआ।
कई लोगों ने इसे भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक और सकारात्मक पहल बताया।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन में पारंपरिक डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell) तकनीक का उपयोग किया जाता है।
इस प्रक्रिया में—
हाइड्रोजन गैस फ्यूल सेल तक पहुंचती है।
फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन के बीच रासायनिक अभिक्रिया होती है।
इस प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है।
यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है।
उप-उत्पाद के रूप में मुख्य रूप से जलवाष्प (Water Vapour) और ऊष्मा निकलती है।
इसी कारण ऐसी ट्रेनों से धुआं या कार्बन उत्सर्जन लगभग नहीं के बराबर होता है।
हाइड्रोजन ट्रेन के प्रमुख फायदे
1. प्रदूषण में कमी
हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती हैं क्योंकि इनमें कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है।
2. कम शोर
इन ट्रेनों का संचालन अपेक्षाकृत शांत होता है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।
3. ऊर्जा दक्षता
फ्यूल सेल तकनीक ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद करती है और भविष्य के स्वच्छ परिवहन का एक महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है।
4. जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भरता
हाइड्रोजन आधारित तकनीक डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकती है।
5. पर्यावरण संरक्षण
ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय रेलवे के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है। यदि भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है, तो इससे—
कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है।
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
हरित परिवहन के राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण में योगदान बढ़ेगा।
हालांकि इस तकनीक के व्यापक विस्तार के लिए हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, ईंधन आपूर्ति और आवश्यक आधारभूत ढांचे का विकास भी महत्वपूर्ण होगा।
किन चुनौतियों का करना होगा सामना?
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भविष्य की तकनीक हैं, लेकिन इनके बड़े पैमाने पर संचालन के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं—
ग्रीन हाइड्रोजन का पर्याप्त उत्पादन।
ईंधन भरने के लिए विशेष स्टेशन विकसित करना।
प्रारंभिक लागत अपेक्षाकृत अधिक होना।
तकनीकी रखरखाव और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता।
सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन।
इन चुनौतियों के समाधान के साथ यह तकनीक आने वाले वर्षों में अधिक प्रभावी हो सकती है।
पर्यावरण के लिए बड़ा कदम
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में कई लक्ष्य निर्धारित किए हैं। हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक इन्हीं प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। यदि इसका सफल विस्तार होता है, तो यह रेलवे क्षेत्र में हरित ऊर्जा के उपयोग को नई दिशा दे सकती है।
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