हरियाणा
पंचकूला स्कूल में लापरवाही उजागर, प्रबंधन पर पुलिस का शिकंजा
Ratna Netam
31 Oct 2026 9:51 PM IST

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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में छह साल की मासूम बच्ची के साथ हुई बेरहमी से मारपीट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में स्कूल प्रशासन की लापरवाही सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। राहत की बात यह है कि गंभीर रूप से घायल बच्ची अब खतरे से बाहर है। चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में उसका इलाज जारी है।यह मामला पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल का है। यहां 28 अक्टूबर को केजी कक्षा में पढ़ने वाली छह वर्षीय बच्ची के साथ तीसरी कक्षा के आठ वर्षीय छात्र द्वारा कथित तौर पर मारपीट की गई थी। घटना के बाद बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली थी। उसके सिर और चेहरे पर चोटें आई थीं। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पंचकूला की पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह ने एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में स्कूल परिसर में बच्चों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही के संकेत मिले हैं। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटना के समय स्कूल में ड्यूटी पर तैनात शिक्षक और कर्मचारी कहां थे। आखिर इतनी गंभीर घटना स्कूल परिसर में कैसे हो गई और समय रहते बच्ची को मदद क्यों नहीं मिल सकी, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।पुलिस स्कूल प्रबंधन, संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ईंट, पत्थर और गमले से किया गया हमला
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना 28 अक्टूबर की दोपहर की है। आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ वर्षीय छात्र ने केजी में पढ़ने वाली बच्ची को उसके पिता के स्कूल पहुंचने की बात कहकर पहली मंजिल पर स्थित एक कमरे में बुलाया था। इसके बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ और छात्र ने बच्ची के साथ मारपीट शुरू कर दी।परिजनों के मुताबिक, आरोपी छात्र ने बच्ची के बाल पकड़कर उसका सिर डेस्क से टकराया। इसके बाद ईंट, पत्थरों और गमले से उसके सिर तथा चेहरे पर कई वार किए। हमले में बच्ची बुरी तरह घायल होकर बेहोश हो गई। घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लगा है, जिसकी जांच की जा रही है।बताया जा रहा है कि बच्ची काफी देर तक घायल अवस्था में कमरे में पड़ी रही। जब वह स्कूल की छुट्टी के बाद घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसके बाद घटना का पता चला और उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर
मारपीट में बच्ची को गंभीर चोटें आई हैं। उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर रेफर किया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण ने पीजीआई पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की थी। इस दौरान चिकित्सकों से उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली गई। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, बच्ची के चेहरे की हड्डियों और नाक में फ्रैक्चर हुआ है। हालांकि, फिलहाल उसकी जान को कोई खतरा नहीं है।बच्ची की हालत खतरे से बाहर होने की खबर से परिवार और परिचितों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, गंभीर चोटों के कारण उसे आगे भी चिकित्सकीय देखभाल और जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक परामर्श की आवश्यकता हो सकती है।
इलाज में देरी को लेकर परिवार ने उठाए सवाल
इस घटना के बाद बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि घटना के बाद बच्ची को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में देरी हुई। परिजनों के अनुसार, पहले उसे सेक्टर-21 स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद इलाज के खर्च को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर उसे सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया।बच्ची के चाचा फाजिल ने आरोप लगाया कि इलाज की व्यवस्था करने में काफी समय बर्बाद हुआ। परिवार का कहना है कि यदि स्कूल में शिक्षकों और कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था ठीक होती तो शायद इस घटना को समय रहते रोका जा सकता था।परिजनों ने स्कूल के प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका सवाल है कि स्कूल परिसर में छोटे बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और घटना के दौरान कोई कर्मचारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
हरियाणा सरकार ने बनाई जांच कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा है कि घटना में यदि किसी अधिकारी, शिक्षक या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।इसके अलावा हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची, स्कूल का ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।आयोग यह भी जानना चाहता है कि घटना के बाद बच्ची को तत्काल चिकित्सा सहायता देने, परिजनों को सूचना देने और स्कूल प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पंचकूला की इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में छोटे बच्चों की देखरेख के लिए पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी होने चाहिए। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी और आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी जरूरी है।फिलहाल पुलिस स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। घटना में शामिल दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए मामले में बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान रखा जा रहा है।अब जांच कमेटी की रिपोर्ट और पुलिस की विवेचना से यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान स्कूल प्रशासन की ओर से कहां चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि गंभीर रूप से घायल छह वर्षीय बच्ची की जान को खतरा नहीं है और उसका उपचार जारी है।
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