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चिराग योजना में स्कूलों को बड़ी राहत तीन साल का बकाया मिला

Kavita2
5 Sept 2026 6:03 PM IST
चिराग योजना में स्कूलों को बड़ी राहत तीन साल का बकाया मिला
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चंडीगढ़। चिराग योजना के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की फीस का लंबे समय से इंतजार कर रहे स्कूल संचालकों को आखिरकार राहत मिली है। करीब तीन साल बाद प्रदेश के 207 निजी स्कूलों को कक्षा पांचवीं से आठवीं तक पढ़ने वाले 1352 विद्यार्थियों की कुल 1,35,01,536 रुपये फीस जारी कर दी गई है। शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से लेकर 2024-25 तक की लंबित फीस का भुगतान किया है।

लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण निजी स्कूल संचालक लगातार फीस जारी करने की मांग कर रहे थे। अब शिक्षा निदेशालय की ओर से तीन शैक्षणिक सत्रों की राशि जारी किए जाने से संबंधित स्कूलों को बड़ी राहत मिली है। यह राशि चिराग योजना के तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के एवज में दी गई है।

जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार तीन वर्षों के दौरान कुल 207 स्कूलों के 1352 विद्यार्थियों की फीस का भुगतान किया गया है। अलग-अलग शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों और स्कूलों की संख्या के आधार पर राशि निर्धारित की गई है।

2022-23 के लिए 56 लाख से ज्यादा जारी

शैक्षणिक सत्र 2022-23 की बात करें तो प्रदेश के कुल 84 निजी स्कूलों में 570 विद्यार्थी चिराग योजना के तहत पढ़ रहे थे। इन विद्यार्थियों की फीस के रूप में शिक्षा निदेशालय ने 56,06,352 रुपये जारी किए हैं।

तीनों शैक्षणिक सत्रों में विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से 2022-23 का आंकड़ा सबसे अधिक रहा। इस सत्र की फीस भी लंबे समय से लंबित थी। राशि जारी होने के बाद संबंधित 84 निजी स्कूलों को राहत मिलेगी।

स्कूलों के लिए यह राशि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यार्थियों को पढ़ाने के दौरान स्टाफ के वेतन, शैक्षणिक सामग्री और दूसरी व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च स्कूलों को नियमित रूप से उठाना पड़ता है।

2023-24 के 357 विद्यार्थियों की फीस मिली

इसके बाद शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए प्रदेश के 58 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 357 विद्यार्थियों की फीस जारी की गई है। इन विद्यार्थियों के लिए कुल 35,91,600 रुपये का भुगतान किया गया है।

इस सत्र के लिए भी स्कूल संचालकों को भुगतान का इंतजार था। अब निदेशालय की ओर से राशि जारी होने के बाद संबंधित निजी स्कूलों के लंबित भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।

चिराग योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर दिया जाता है और निर्धारित नियमों के अनुसार उनकी फीस की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसी व्यवस्था के तहत निजी स्कूलों को अब तीन वर्षों की लंबित राशि उपलब्ध कराई गई है।

2024-25 के लिए 43 लाख रुपये से ज्यादा

शैक्षणिक सत्र 2024-25 में चिराग योजना के तहत 65 निजी स्कूलों में कुल 425 विद्यार्थी कक्षा पांचवीं से आठवीं तक पढ़ रहे थे। शिक्षा निदेशालय ने इन विद्यार्थियों की फीस के रूप में 43,03,584 रुपये जारी किए हैं।

इस तरह तीनों शैक्षणिक सत्रों को मिलाकर 207 स्कूलों के 1352 विद्यार्थियों के लिए कुल 1,35,01,536 रुपये का भुगतान हुआ है।

राशि जारी होने से उन स्कूलों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें विद्यार्थियों को पढ़ाने के बावजूद निर्धारित फीस की प्रतिपूर्ति के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

तीन साल से था भुगतान का इंतजार

निजी स्कूलों के लिए सबसे बड़ी परेशानी भुगतान में हुई देरी थी। शैक्षणिक सत्र 2022-23 की राशि अब जाकर जारी होने के कारण कुछ स्कूलों को करीब तीन साल तक इंतजार करना पड़ा।

चिराग योजना में शामिल स्कूल विद्यार्थियों की पढ़ाई से संबंधित खर्च अपनी नियमित व्यवस्था से उठाते हैं। ऐसे में सरकारी प्रतिपूर्ति में लंबी देरी होने से स्कूलों के वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ सकता है।

अब तीन सत्रों की राशि एक साथ जारी होने से स्कूलों को अपने पुराने बकाया का भुगतान करने और दूसरी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

क्या है चिराग योजना?

चिराग योजना का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने का अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत निर्धारित पात्रता और नियमों के आधार पर विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाता है।

इन विद्यार्थियों की शिक्षा के बदले सरकार की ओर से निजी स्कूलों को निर्धारित राशि का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा के विकल्प बढ़ाना है।

योजना में स्कूल और विद्यार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया पूरी की जाती है। दस्तावेजों और पात्रता से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षा विभाग भुगतान जारी करता है।

1352 विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ा भुगतान

तीन वर्षों की पूरी तस्वीर देखें तो योजना के तहत कुल 1352 विद्यार्थियों की फीस का भुगतान किया गया है। इनमें 2022-23 के 570, 2023-24 के 357 और 2024-25 के 425 विद्यार्थी शामिल हैं।

इसी तरह स्कूलों की संख्या क्रमशः 84, 58 और 65 रही। तीनों सत्रों को जोड़ने पर कुल संख्या 207 स्कूल होती है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना के तहत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की शिक्षा से जुड़ी फीस सरकार द्वारा वहन की जा रही है।

समय पर भुगतान की उम्मीद

बकाया राशि मिलने के बाद अब निजी स्कूलों की नजर आगामी शैक्षणिक सत्रों की फीस पर भी रहेगी। स्कूल संचालकों के लिए फीस प्रतिपूर्ति समय पर होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें शिक्षकों के वेतन, बिजली, रखरखाव और अन्य शैक्षणिक खर्च नियमित रूप से पूरे करने होते हैं।

तीन साल पुरानी राशि का भुगतान होने से स्कूलों को राहत जरूर मिली है, लेकिन भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की आवश्यकता भी सामने आती है।

यदि दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया नियमित समयसीमा में पूरी होती है तो योजना में शामिल स्कूलों के लिए वित्तीय व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा।

स्कूलों को बड़ी राहत

फिलहाल शिक्षा निदेशालय की ओर से 1.35 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी किए जाने को संबंधित निजी स्कूलों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सबसे पुराना भुगतान 2022-23 सत्र से जुड़ा था, जबकि इसके साथ अगले दो सत्रों की राशि भी जारी कर दी गई है।

तीन वर्षों से लंबित फीस मिलने के बाद अब 207 निजी स्कूलों को आर्थिक राहत मिलेगी। वहीं 1352 विद्यार्थियों की शिक्षा के बदले निर्धारित सरकारी प्रतिपूर्ति का भुगतान भी पूरा हो गया है।

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