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हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत, धान खरीद की 27 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा हटी

Kavita2
19 Oct 2026 12:35 PM IST
हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत, धान खरीद की 27 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा हटी
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चंडीगढ़। हरियाणा में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद को लेकर प्रति एकड़ 27 क्विंटल की निर्धारित सीमा में महत्वपूर्ण छूट देने का फैसला किया है। अब जिन किसानों की वास्तविक पैदावार इस सीमा से अधिक है, वे अपनी अतिरिक्त उपज भी सरकारी खरीद के लिए प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके लिए किसानों को संबंधित अधिकारियों के पास लिखित अनुरोध करना होगा। सरकार ने अतिरिक्त पैदावार के दावों का 48 घंटे के भीतर सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय से विशेष रूप से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खेतों में प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल तक धान की पैदावार हुई है।

अब तक सरकारी खरीद के दौरान प्रति एकड़ अधिकतम 27 क्विंटल धान का गेट पास जारी किया जा रहा था। इससे ज्यादा उत्पादन करने वाले किसानों को अपनी अतिरिक्त फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। नई व्यवस्था के तहत सत्यापन के बाद निर्धारित सीमा से अधिक धान की सरकारी खरीद का रास्ता खुल जाएगा।

27 क्विंटल की सीमा से परेशान थे किसान

हरियाणा की अनाज मंडियों में धान खरीद के लिए प्रति एकड़ 27 क्विंटल की सीमा लागू होने से किसानों को परेशानी हो रही थी। कई किसानों का कहना था कि उनके खेतों में इस निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक उत्पादन हुआ है।

विशेष रूप से जिन किसानों की पैदावार प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल तक पहुंच गई थी, उन्हें अतिरिक्त उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

अब तक मंडियों में किसानों को निर्धारित सीमा के आधार पर ही गेट पास जारी किए जा रहे थे। ऐसे में अतिरिक्त धान की सरकारी खरीद को लेकर असमंजस बना हुआ था।

सरकार के नए फैसले से किसानों को उनकी वास्तविक पैदावार के अनुसार अधिक धान बेचने का अवसर मिलेगा।

48 घंटे के भीतर होगा अतिरिक्त पैदावार का सत्यापन

सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, जिन किसानों की वास्तविक धान पैदावार निर्धारित सीमा से अधिक है, वे अतिरिक्त खरीद के लिए लिखित अनुरोध कर सकते हैं।

संबंधित अधिकारियों को ऐसे आवेदनों की जांच करके 48 घंटे के भीतर सत्यापन करना होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों के दावों की जल्द जांच करके उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाना है।

यदि किसान की अतिरिक्त पैदावार का दावा सही पाया जाता है, तो निर्धारित सीमा से अधिक उपज की खरीद की अनुमति दी जा सकेगी।

राजस्व या कृषि विभाग की पुष्टि होगी मान्य

सरकार ने अतिरिक्त पैदावार के सत्यापन के लिए राजस्व विभाग और कृषि विभाग को जिम्मेदारी दी है।

जारी निर्देशों के अनुसार, यदि इन दोनों में से कोई एक विभाग किसान के अतिरिक्त उत्पादन के दावे की पुष्टि कर देता है, तो अतिरिक्त धान की खरीद की जा सकेगी।

इससे किसानों को दोनों विभागों से अलग-अलग पुष्टि कराने की अनिवार्यता नहीं रहेगी।

इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों के आवेदन का जल्द निस्तारण करने और सरकारी खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।

दो लाख एकड़ में की गई धान की रोपाई

जिले में इस वर्ष लगभग दो लाख एकड़ क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसमें करीब एक लाख एकड़ रकबा ऐसा है, जहां प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल तक पैदावार दर्ज की गई है।

इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में किसान निर्धारित 27 क्विंटल की सीमा से प्रभावित हो रहे थे।

जिन किसानों की वास्तविक पैदावार अधिक हुई है, उनके लिए नई व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

किसानों के विरोध के बाद सरकार ने बदला फैसला

धान खरीद की सीमा को लेकर हरियाणा के विभिन्न जिलों में किसान संगठनों ने विरोध जताया था। अंबाला, पेहोवा और शाहाबाद में किसानों ने अपनी समस्या उठाई।

किसानों का कहना था कि वास्तविक उत्पादन अधिक होने के बावजूद सरकारी पोर्टल और मंडियों में सीमित मात्रा में धान बेचने की अनुमति मिल रही है।

इन शिकायतों के बाद सरकार ने अतिरिक्त पैदावार के सत्यापन और खरीद की व्यवस्था लागू की है।

हर जिले में अलग-अलग निर्धारित है खरीद सीमा

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए धान की औसत पैदावार के आधार पर जिलावार खरीद सीमा निर्धारित की गई थी।

यह सीमा पिछले तीन वर्षों की औसत पैदावार को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। अलग-अलग जिलों में निर्धारित सीमा 21.39 से 29.26 क्विंटल प्रति एकड़ के बीच है।

इसलिए नई व्यवस्था को सभी किसानों के लिए बिना किसी शर्त के खरीद सीमा समाप्त करने के बजाय सत्यापित अतिरिक्त पैदावार की खरीद की अनुमति के रूप में समझना जरूरी है।

किसानों को नहीं बेचना पड़ेगा अतिरिक्त धान सस्ते में

किसानों की प्रमुख चिंता यह थी कि निर्धारित सीमा से अधिक धान की सरकारी खरीद नहीं होने पर उन्हें अतिरिक्त फसल बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते थे।

ऐसी स्थिति में किसानों को बाजार में अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने का जोखिम रहता है।

अब वास्तविक पैदावार का सत्यापन होने के बाद अतिरिक्त धान भी सरकारी खरीद व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा।

इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलने और आर्थिक नुकसान की आशंका कम होने की उम्मीद है।

मंडियों में गेट पास की परेशानी होगी कम

सरकारी धान खरीद में गेट पास महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके माध्यम से किसान की उपज को मंडी में प्रवेश और खरीद संबंधी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

अब अतिरिक्त पैदावार की पुष्टि होने पर निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा के लिए भी खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

किसानों को ऐसे मिलेगा नई व्यवस्था का लाभ

जिन किसानों की वास्तविक धान पैदावार निर्धारित सीमा से अधिक हुई है, उन्हें संबंधित अधिकारियों को लिखित अनुरोध देना होगा।

इसके बाद राजस्व या कृषि विभाग वास्तविक उत्पादन की जांच करेगा। संबंधित विभाग से पुष्टि मिलने पर किसान की अतिरिक्त पैदावार को खरीद प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।

किसान अपना फसल पंजीकरण और भूमि से संबंधित विवरण तैयार रखें, ताकि सत्यापन में अनावश्यक देरी न हो।

किसानों की आय बढ़ाने में मिल सकती है मदद

सरकार की नई व्यवस्था से विशेष रूप से उन किसानों को फायदा मिलने की संभावना है, जिन्होंने बेहतर उत्पादन प्राप्त किया है।

धान की अधिक पैदावार होने पर किसानों को उसका उचित मूल्य मिलना जरूरी है। निर्धारित सीमा के कारण अतिरिक्त उपज की खरीद प्रभावित होने से उनकी आय पर असर पड़ सकता था।

अब सत्यापन के बाद अतिरिक्त धान की खरीद का रास्ता खुलने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल सरकार ने अतिरिक्त पैदावार से संबंधित शिकायतों का 48 घंटे में सत्यापन करने की व्यवस्था लागू की है। इस निर्णय का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि मंडियों और संबंधित विभागों में इसका कितनी प्रभावी तरीके से पालन किया जाता है।

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