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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच बड़ी बैठक, CM सैनी और अनिल विज पहुंचे

Kavita2
23 Oct 2026 6:02 PM IST

चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के बीच शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत शुरू हो गई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी शामिल हुए हैं। बैठक में बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बिजली विभाग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने से पैदा हुए विवाद का समाधान निकालना है।

हरियाणा में बिजली कर्मचारी 22 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस मिलने से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं, राज्य सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने और हड़ताल समाप्त कराने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक विकल्पों पर विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी बैठक में शामिल

ऊर्जा मंत्री अनिल विज और बिजली कर्मचारी नेताओं के बीच चल रही बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार का पक्ष रख रहे हैं। बैठक में बिजली वितरण व्यवस्था, नियामक आयोग के निर्णय और आंदोलन समाप्त करने की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।

सरकार का प्रयास है कि बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जाए और बिजली कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए राजी किया जा सके।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार बिजली कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और नियामक आयोग के फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

निजी कंपनी को लाइसेंस देने से शुरू हुआ विवाद

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए 25 वर्षों का समानांतर लाइसेंस प्रदान किया था।

इस निर्णय के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने विरोध शुरू कर दिया।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि गुरुग्राम जैसे औद्योगिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति मिलने से सरकारी कंपनियों के राजस्व पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, यह समानांतर वितरण लाइसेंस है। इसका अर्थ सरकारी बिजली वितरण कंपनियों का संचालन तत्काल निजी कंपनी को सौंप देना नहीं है। निजी कंपनी को मौजूदा सरकारी वितरण कंपनियों के साथ बिजली आपूर्ति करने की अनुमति दी गई है।

तीन दिवसीय हड़ताल से बिजली व्यवस्था प्रभावित

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था।

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, आंदोलन में लगभग 40 हजार बिजली कर्मचारी शामिल हैं।

हड़ताल का असर गुरुग्राम सहित राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई। तकनीकी खराबियों की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ीं।

सरकार ने आवश्यक बिजली सेवाओं को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू की हैं।

अनिल विज बोले- समाधान लगभग तैयार

बैठक से पहले ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को बिजली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करके काम पर लौटने की अपील की थी।

विज ने पंचकूला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार इस विवाद का समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस संबंध में चर्चा हो चुकी है और कर्मचारी नेताओं के साथ दोपहर तीन बजे बैठक निर्धारित की गई है।

ऊर्जा मंत्री ने उम्मीद जताई कि बातचीत के बाद कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो सकती है।

हालांकि, बैठक में किसी अंतिम समझौते और हड़ताल वापस लेने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बिजली अधिनियम की धारा 108 पर चर्चा

इस विवाद के समाधान के लिए राज्य सरकार बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 का उपयोग करने के विकल्प पर विचार कर रही है।

इस प्रावधान के तहत राज्य सरकार सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश दे सकती है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि सरकार इस कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करके निजी बिजली वितरण लाइसेंस से जुड़े विवाद का समाधान तलाश रही है।

कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार नियामक आयोग के निर्णय के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए।

हालांकि, धारा 108 का उपयोग अपने आप निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द होने की गारंटी नहीं देता। इसके लिए संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और नियामकीय अधिकारों का पालन आवश्यक होगा।

सरकार ने कानूनी चुनौती देने का किया ऐलान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हरियाणा सरकार निजी कंपनी को लाइसेंस देने के निर्णय के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) का रुख करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को उचित कानूनी मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करेगी।

उन्होंने कर्मचारी संगठनों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने की अपील की थी।

सरकार ने कर्मचारी संगठनों को यह विकल्प भी दिया था कि वे अपनी पसंद के वकीलों के माध्यम से कानूनी पक्ष रखने में सहयोग कर सकते हैं।

कर्मचारी संगठनों की क्या है मांग?

बिजली कर्मचारी संगठनों का मुख्य विरोध सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी के प्रवेश को लेकर है।

उनका कहना है कि यदि निजी कंपनियां अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करने लगेंगी, तो सरकारी वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।

कर्मचारी संगठनों ने सरकारी बिजली वितरण कंपनियों को मजबूत बनाने और निजी वितरण लाइसेंस संबंधी फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

कुछ संगठनों ने लाइसेंस को वापस लेने के साथ भविष्य में इस प्रकार के समानांतर लाइसेंस जारी नहीं करने की नीति बनाने की भी मांग उठाई है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि नियामक आयोग एक वैधानिक संस्था है और उसके फैसले के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

आम उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों में महसूस किया गया, जहां तकनीकी खराबियों और बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायतों का निपटारा प्रभावित हुआ।

गुरुग्राम में कई आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की खबरें सामने आई हैं।

बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरों में पानी की उपलब्धता, कार्यालयों के कामकाज और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ा।

राज्य सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों और बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं।

बैठक के नतीजे पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की मौजूदगी में हो रही इस बैठक को बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार के सामने एक ओर कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालने की चुनौती है, जबकि दूसरी ओर राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।

कर्मचारी संगठनों के सामने अब यह तय करने का सवाल है कि सरकार के कानूनी एवं प्रशासनिक आश्वासनों के आधार पर आंदोलन समाप्त किया जाए या आगे जारी रखा जाए।

फिलहाल बैठक के अंतिम नतीजे की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच बातचीत के परिणाम पर टिकी हैं।

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