
x
Haryana हरियाणा के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार देश और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसे में, राज्य में खेल और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग जोर पकड़ रही है। कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल ने हाल ही में हरियाणा के खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए, यहां 'नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी' (राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय) का एक कैंपस या क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई है। उन्होंने राज्य में खेल विज्ञान, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) और उन्नत कोचिंग सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई है।
सांसद ने बताया कि भले ही हरियाणा की आबादी देश की कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत है, लेकिन हाल ही में संपन्न हुए एशियाई खेलों में भारत के 21 स्वर्ण पदकों में से 14 पदक जीतने में यहां के खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, पेरिस ओलंपिक में भारत के कुल खिलाड़ियों में से लगभग 22 प्रतिशत खिलाड़ी हरियाणा से थे। फिर भी, भारत की 'नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी' का एकमात्र कैंपस यहां से 2,000 किलोमीटर से भी अधिक दूर, मणिपुर में स्थित है। 'नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी' की स्थापना 'नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी एक्ट, 2018' के तहत की गई थी। यह खेल विज्ञान, खेल तकनीक, खेल प्रबंधन और खेल कोचिंग के क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष राष्ट्रीय संस्थान है। साथ ही, यह कुछ चुनिंदा खेलों के लिए एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी काम करता है।
सांसद ने आगे बताया कि भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में हरियाणा से सबसे ज्यादा खिलाड़ी ओलंपिक में गए। यहां के खिलाड़ियों ने कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग और कबड्डी में अपना लोहा मनवाया है। हरियाणा के गांवों तक पदक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन उन पदकों को हासिल करने में मदद करने वाला 'खेल विज्ञान' (स्पोर्ट्स साइंस) यहां उपलब्ध नहीं है। खेल विज्ञान, पुनर्वास और उन्नत कोचिंग के लिए खिलाड़ियों को अभी भी राज्य के बाहर, और कई बार तो देश के बाहर भी देखना पड़ता है। कुरुक्षेत्र के सांसद, जो खुद खेलों के शौकीन हैं और पोलो भी खेलते हैं, ने इस मामले को केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के सामने उठाया है।
कुरुक्षेत्र में 'नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी' का कैंपस या क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के अपने प्रस्ताव में, सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि हरियाणा भारत के प्रमुख खेल केंद्रों (स्पोर्टिंग पावरहाउस) में से एक बनकर उभरा है, खासकर कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग और कबड्डी जैसे खेलों में। राज्य में राष्ट्रीय स्तर के खेल विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना से पूरे उत्तरी क्षेत्र के खिलाड़ियों, कोचों, खेल पेशेवरों और शोधकर्ताओं को काफी बढ़ावा मिलेगा।
कुरुक्षेत्र का पक्ष रखते हुए, सांसद ने कहा, "कुरुक्षेत्र एक मजबूत शैक्षिक केंद्र है, जहाँ खेल तकनीक और बायोमैकेनिक्स के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र; शारीरिक शिक्षा और खेल मनोविज्ञान के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय; और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) व रिकवरी के लिए श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान मौजूद हैं। यह खेल तकनीक, खेल मनोविज्ञान, शारीरिक शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को संभव बनाता है।" सांसद के अनुसार, 'राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अधिनियम, 2018' के तहत, विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार की मंजूरी से पूरे भारत में अपने परिसर/क्षेत्रीय केंद्र और विशेष अनुसंधान इकाइयां स्थापित करने का अधिकार है।
उन्होंने आगे कहा, "ढांचा पहले से मौजूद है, हमें बस कुरुक्षेत्र में इस केंद्र को स्थापित करने के लिए एक निर्णय की आवश्यकता है। एक ही शहर में तीन बड़े संस्थानों की मौजूदगी और राजमार्गों व रेल नेटवर्क से अच्छी कनेक्टिविटी, कुरुक्षेत्र को पूरे उत्तरी क्षेत्र की सेवा करने के लिए एक आदर्श केंद्र बनाती है। प्रस्तावित केंद्र का मुख्य फोकस खेल विज्ञान और पुनर्वास, कोचिंग शिक्षा, बायोमैकेनिक्स, पैरा-स्पोर्ट्स और पारंपरिक भारतीय खेलों में अनुसंधान पर होगा।"
इस केंद्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए, सांसद ने कहा कि हरियाणा के अखाड़ों में सदियों से कुश्ती और कबड्डी को निखारा गया है; अब इन्हें केवल पुरानी यादों के सहारे नहीं, बल्कि आधुनिक प्रयोगशालाओं की जरूरत है। हरियाणा के गांवों के उभरते पहलवानों को आधुनिक खेलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य छोड़कर बाहर न जाना पड़े। नवीन जिंदल ने कहा, "हरियाणा ने दशकों से चैंपियन दिए हैं। अब समय आ गया है कि यह राज्य ऐसे खेल वैज्ञानिक, कोच और फिजियोथेरेपिस्ट भी तैयार करे, जो इन खिलाड़ियों को और बेहतर बना सकें। हरियाणा में राष्ट्रीय स्तर का संस्थान होने से यहां के खेल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और खिलाड़ियों, कोचों, खेल पेशेवरों व शोधकर्ताओं के लिए बेहतर अवसर पैदा होंगे।" वहीं, कोचों का भी मानना है कि यह केंद्र राज्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे खेल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हरियाणा की स्थिति और मजबूत होगी।
Next Story





