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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का बड़ा फैसला

Kiran
20 Oct 2026 12:54 PM IST
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का बड़ा फैसला
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Haryana हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने बिजली वितरण के प्रस्तावित निजीकरण और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए निजी कंपनी 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को समानांतर वितरण लाइसेंस (पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस) देने के फैसले के विरोध में 22 अक्टूबर से तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। यह हड़ताल 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा' द्वारा घोषित की गई है। मोर्चे का आरोप है कि सरकार ने उनके पहले दिए गए हड़ताल के नोटिस को नजरअंदाज कर दिया और ऐसे फैसले लिए, जिन्हें उन्होंने "कर्मचारी-विरोधी और उपभोक्ता-विरोधी" बताया है।
मोर्चे ने अपने संशोधित हड़ताल नोटिस में कहा कि HERC ने दशहरा से एक दिन पहले, 18 अक्टूबर को 'इलेवन पावर' को गुरुग्राम और नूंह के लिए 25 साल का समानांतर वितरण लाइसेंस दे दिया है। मोर्चे ने इस फैसले को "जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी" करार दिया है। उनका आरोप है कि इस कदम का मकसद लाभदायक क्षेत्रों को निजी कंपनियों को सौंपना और सरकारी स्वामित्व वाली 'दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम' (DHBVN) को कमजोर करना है।
मोर्चे ने बताया कि 10 अगस्त को बिजली मंत्री के साथ हुई बैठक में मिले आश्वासनों के बावजूद, उनकी मांगों या पहले दिए गए हड़ताल के नोटिस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय, उनका आरोप है कि बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया गया है। मोर्चे ने कहा कि "हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।" उन्होंने घोषणा की कि बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 22 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक पूरे राज्य में पूर्ण हड़ताल रहेगी।
कर्मचारी संगठन ने बताया कि उनके पिछले नोटिस में ही चेतावनी दी गई थी कि अगर निजीकरण की नीतियां लागू की जाती हैं, तो इसे बिना किसी अलग नोटिस के 'अनिश्चितकालीन हड़ताल' के लिए पहले से दिया गया नोटिस माना जाएगा। HERC द्वारा लाइसेंस दिए जाने के फैसले के बाद, मोर्चे का मानना ​​है कि सरकार बातचीत करने को तैयार नहीं है, जिसके चलते कर्मचारियों और इंजीनियरों के पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। मोर्चे ने चेतावनी दी है कि अगर हड़ताल शुरू होने से पहले उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता और समानांतर वितरण लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता है, तो भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के औद्योगिक असंतोष (industrial unrest) के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
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