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प्रदूषण पर मानेसर नगर निगम का बड़ा एक्शन, सड़कों पर दौड़ेंगी एंटी स्मॉग गन

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23 Oct 2026 4:44 PM IST
प्रदूषण पर मानेसर नगर निगम का बड़ा एक्शन, सड़कों पर दौड़ेंगी एंटी स्मॉग गन
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मानेसर। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा के मानेसर नगर निगम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-1) के तहत निगम क्षेत्र की सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सड़कों के किनारे जमा धूल-मिट्टी को हवा में फैलने से रोकने के उद्देश्य से ट्रीटेड यानी उपचारित पानी का नियमित छिड़काव किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से इस कार्य में पांच ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन, दो ट्रैक्टर माउंटेड मशीनों और नौ पानी के टैंकरों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। निगम का उद्देश्य सड़क पर उड़ने वाले धूलकणों को नियंत्रित करना और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।

ग्रेप-1 के तहत प्रदूषण नियंत्रण अभियान तेज

मानेसर नगर निगम ने वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए ग्रेप-1 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई शुरू की है।

इसके अंतर्गत उन सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां वाहनों की आवाजाही के कारण धूल अधिक उड़ती है।

सड़कों के किनारे जमा मिट्टी और धूल वाहनों के गुजरने पर हवा में फैल जाती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ सकता है।

इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम ने एंटी स्मॉग गन और पानी के टैंकरों की सहायता से छिड़काव बढ़ाया है।

इस पहल से वातावरण में उड़ने वाले धूलकणों को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पांच ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल

प्रदूषण नियंत्रण अभियान में पांच ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

एंटी स्मॉग गन ऐसी मशीन होती है, जो पानी की बहुत छोटी बूंदों को दबाव के साथ हवा में छोड़ती है।

इन बूंदों के संपर्क में आने पर हवा में मौजूद कुछ धूलकण नीचे बैठ सकते हैं।

इस तकनीक का इस्तेमाल सड़क निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और अधिक धूल वाले स्थानों पर किया जाता है।

ट्रक पर लगी होने के कारण इन मशीनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना अपेक्षाकृत आसान होता है।

नगर निगम ने अक्टूबर 2026 में ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन किराए पर लेने और उनके संचालन से संबंधित निविदा भी जारी की थी।

दो ट्रैक्टर माउंटेड मशीनें भी तैनात

एंटी स्मॉग गन के अलावा दो ट्रैक्टर माउंटेड मशीनों का उपयोग भी किया जा रहा है।

इन मशीनों की सहायता से सड़क किनारे और अन्य निर्धारित स्थानों पर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।

ट्रैक्टर माउंटेड मशीनें उन स्थानों तक पहुंचने में उपयोगी हो सकती हैं, जहां बड़े ट्रकों की आवाजाही सीमित होती है।

निगम का प्रयास है कि अधिक से अधिक धूल प्रभावित इलाकों में नियमित छिड़काव किया जाए।

हालांकि, किन सड़कों पर कितनी बार छिड़काव किया जाएगा, इसका विस्तृत दैनिक कार्यक्रम उपलब्ध नहीं है।

नौ टैंकरों से सड़कों पर छिड़का जा रहा पानी

नगर निगम ने सड़कों की धूल नियंत्रित करने के लिए नौ पानी के टैंकर भी लगाए हैं।

इन टैंकरों के माध्यम से मुख्य सड़कों और किनारों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

सड़क की सतह पर मौजूद धूल में नमी आने से उसके हवा में उड़ने की संभावना कम हो सकती है।

निगम की ओर से इस काम में उपचारित पानी के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है।

ट्रीटेड पानी का उपयोग करने से स्वच्छ पेयजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, छिड़काव की प्रभावशीलता पानी की मात्रा, मौसम, यातायात और सड़क पर जमा धूल की स्थिति पर निर्भर करेगी।

औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण बढ़ती है चुनौती

मानेसर हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है।

यहां आईएमटी मानेसर सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कारखाने और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।

इन इलाकों में मालवाहक वाहनों और कर्मचारियों के आवागमन के कारण सड़कों पर यातायात का दबाव अधिक रहता है।

इसके अलावा निर्माण गतिविधियों तथा खुले स्थानों पर जमा धूल भी वायु प्रदूषण का कारण बन सकती है।

ऐसे में नगर निगम के लिए सड़क की नियमित सफाई और धूल नियंत्रण महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्ययोजना

मानेसर नगर निगम की ओर से वर्ष 2026 के लिए धूल नियंत्रण और सड़क सफाई की कार्ययोजना भी तैयार की गई है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को उपलब्ध कराई गई योजना के अनुसार, निगम ने वर्ष 2026 के दौरान 36 सड़कों और लगभग 68.3 किलोमीटर सड़क क्षेत्र को धूलमुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

इस योजना में सड़क की सफाई, एंटी स्मॉग गन और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपाय शामिल हैं।

सड़क पर उड़ने वाली धूल कम करने के लिए नियमित निगरानी और आवश्यक मशीनों की उपलब्धता पर जोर दिया गया है।

सितंबर में संशोधित किए गए ग्रेप के नियम

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सितंबर 2026 में ग्रेप की कार्ययोजना में संशोधन किया था।

संशोधित व्यवस्था में सड़क की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन और परिवहन से संबंधित उपायों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

आयोग ने ग्रेप के विभिन्न चरणों के अंतर्गत लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों और नियंत्रण उपायों की भी समीक्षा की है।

29 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, संशोधित ग्रेप व्यवस्था का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों को समय रहते लागू करना है।

क्या है ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान?

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रेप दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए बनाई गई चरणबद्ध व्यवस्था है।

इसके अंतर्गत वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर अलग-अलग उपाय लागू किए जाते हैं।

ग्रेप के पहले चरण में सड़क की धूल रोकने, निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाती है।

वायु गुणवत्ता अधिक खराब होने पर अगले चरणों के तहत अतिरिक्त प्रतिबंध और नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकते हैं।

इस व्यवस्था को लागू करने में नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

सड़क की धूल से स्वास्थ्य पर पड़ता है असर

सड़क की धूल में विभिन्न आकार के सूक्ष्म कण मौजूद हो सकते हैं।

इनमें पीएम10 और पीएम2.5 जैसे कण स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं।

ऐसे कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और श्वसन संबंधी परेशानियां बढ़ा सकते हैं।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों को प्रदूषित वातावरण में अधिक परेशानी हो सकती है।

इसी कारण सड़क की धूल नियंत्रित करना शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने की महत्वपूर्ण रणनीतियों में शामिल है।

हालांकि, केवल पानी का छिड़काव करके वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

नियमित सफाई भी जरूरी

प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञों के अनुसार, पानी के छिड़काव के साथ सड़कों से जमा धूल हटाना भी आवश्यक है।

यदि धूल-मिट्टी सड़क पर ही बनी रहती है, तो पानी सूखने के बाद उसके दोबारा उड़ने की संभावना रहती है।

इसलिए यांत्रिक सड़क सफाई, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और सड़क किनारे जमा मिट्टी हटाना भी महत्वपूर्ण उपाय हैं।

नगर निगम को सड़क की स्थिति और प्रदूषण के स्रोतों के अनुसार अलग-अलग उपाय अपनाने की आवश्यकता हो सकती है।

नागरिकों का सहयोग भी आवश्यक

प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ आम नागरिकों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का सहयोग भी जरूरी है।

निर्माण सामग्री को खुले में नहीं छोड़ना चाहिए और वाहनों में ले जाते समय उसे सुरक्षित तरीके से ढकना चाहिए।

सड़क किनारे कचरा या पत्तियां जलाने से भी वायु प्रदूषण बढ़ सकता है।

इसके अलावा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।

उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी संबंधित पर्यावरणीय मानकों के अनुसार गतिविधियां संचालित करनी चाहिए।

प्रदूषण नियंत्रण पर निगम की नजर

मानेसर नगर निगम ने ग्रेप-1 के तहत सड़कों पर धूल नियंत्रण की गतिविधियों को तेज करने की जानकारी दी है।

पांच ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन, दो ट्रैक्टर माउंटेड मशीनों और नौ पानी के टैंकरों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

इन प्रयासों से सड़क की धूल कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार का आकलन प्रदूषण निगरानी के आंकड़ों से ही होगा।

आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और प्रदूषण के स्तर के अनुसार नियंत्रण उपायों की आवश्यकता बनी रहेगी।

फिलहाल नगर निगम का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना और ग्रेप-1 के निर्देशों के अनुसार प्रदूषण रोकथाम की कार्रवाई जारी रखना है।

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