हरियाणा

सूरजकुंड दिवाली मेले में फीकी रौनक, स्टॉल संचालक परेशान

Kavita2
24 Oct 2026 5:10 PM IST
सूरजकुंड दिवाली मेले में फीकी रौनक, स्टॉल संचालक परेशान
x

फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद स्थित प्रसिद्ध सूरजकुंड में आयोजित दिवाली मेले की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक उत्साहजनक नहीं रही है। चार दिवसीय मेले के दूसरे दिन भी दर्शकों की संख्या बेहद कम देखने को मिली। आयोजकों और स्टॉल संचालकों को उम्मीद थी कि सप्ताहांत होने के कारण शनिवार को बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचेंगे, लेकिन मेला परिसर में अपेक्षाकृत कम भीड़ नजर आई। मुख्य चौपाल में लगी आधी से अधिक कुर्सियां खाली दिखाई दीं। वहीं, मेले में दुकानें लगाने वाले हस्तशिल्पियों और व्यापारियों के चेहरों पर भी चिंता साफ नजर आई। कई स्टॉल संचालकों का कहना है कि यदि दर्शकों की संख्या इसी तरह कम रही तो उनके लिए स्टॉल का किराया निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

दूसरे दिन भी दर्शकों की संख्या रही कम

सूरजकुंड में 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित दिवाली मेले को लेकर शुरुआत से ही उत्साह की उम्मीद जताई जा रही थी। मेले में हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आकर्षित करने की तैयारी की गई थी।

हालांकि, दूसरे दिन मेले में दर्शकों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही। मेला परिसर के कई हिस्सों में अपेक्षाकृत सन्नाटा नजर आया।

मुख्य चौपाल में भी दर्शकों की कम मौजूदगी दिखाई दी। यहां लगी आधी से अधिक कुर्सियां खाली नजर आईं। आमतौर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों के दौरान चौपाल पर लोगों की भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में वैसी रौनक नहीं दिखाई दी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया था उद्घाटन

चार दिवसीय सूरजकुंड दिवाली मेले का उद्घाटन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया था।

इस अवसर पर प्रदेश के पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी मौजूद रहे। मेले का आयोजन दिवाली के अवसर पर लोगों को पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया है।

सूरजकुंड अपने अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के लिए प्रसिद्ध है। यहां आयोजित होने वाले मेलों में अलग-अलग क्षेत्रों की कला और पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

दिवाली मेले से भी हस्तशिल्पियों और व्यापारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद थी। हालांकि, दूसरे दिन तक दर्शकों की कम मौजूदगी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

स्टॉल संचालकों को किराया निकालने की चिंता

मेले में दुकानें लगाने वाले स्टॉल संचालकों की सबसे बड़ी परेशानी ग्राहकों की कमी है। व्यापारियों ने उम्मीद की थी कि दिवाली के अवसर पर लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंचेंगे।

लेकिन शुरुआती दो दिनों में दर्शकों की कम मौजूदगी के कारण बिक्री प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

कुछ स्टॉल संचालकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा है कि मेले में दुकान लगाने का किराया तक निकालना मुश्किल हो जाएगा।

किसी भी मेले में दुकान लगाने के लिए व्यापारियों को स्टॉल किराए के साथ सामान लाने, परिवहन, कर्मचारियों और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च करना पड़ता है।

ऐसे में यदि ग्राहकों की संख्या कम रहती है तो छोटे व्यापारियों और हस्तशिल्पियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कुछ हस्तशिल्पियों के स्टॉल भी नहीं लगे

मेले की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, दूसरे दिन तक कुछ हस्तशिल्पियों के स्टॉल पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए थे।

इस वजह से संबंधित हस्तशिल्पी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री शुरू नहीं कर सके।

चार दिवसीय मेले में प्रत्येक दिन कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में शुरुआती दिनों में स्टॉल तैयार नहीं होने से व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका रहती है।

विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले हस्तशिल्पियों के लिए समय पर स्टॉल मिलना और बिक्री शुरू करना जरूरी होता है।

हालांकि, स्टॉल तैयार होने में देरी के पीछे क्या कारण रहे, इस संबंध में आयोजकों का विस्तृत पक्ष उपलब्ध नहीं है।

मुख्य चौपाल की आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली

सूरजकुंड मेले में मुख्य चौपाल सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होती है। यहां आने वाले दर्शक विभिन्न कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं।

लेकिन दिवाली मेले के दूसरे दिन मुख्य चौपाल में दर्शकों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी।

आधी से अधिक कुर्सियां खाली रहने से यह स्पष्ट हुआ कि शुरुआती दिनों में मेले को अपेक्षित दर्शक नहीं मिल पाए हैं।

हालांकि, केवल दूसरे दिन की भीड़ के आधार पर पूरे आयोजन की सफलता या असफलता का आकलन करना जल्दबाजी होगी।

मेले के अभी दो दिन शेष हैं और आयोजकों को उम्मीद हो सकती है कि आगामी दिनों में दर्शकों की संख्या बढ़ेगी।

दिवाली पर खरीदारी की उम्मीद लेकर पहुंचे व्यापारी

दिवाली का त्योहार पारंपरिक सजावट, हस्तनिर्मित सामान और उपहारों की खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी कारण दिवाली मेलों में हस्तशिल्पियों और छोटे व्यापारियों को अच्छा कारोबार होने की उम्मीद रहती है।

सूरजकुंड जैसे प्रसिद्ध आयोजन स्थल पर मेले में भाग लेने वाले व्यापारियों को बड़ी संख्या में ग्राहकों के आने की संभावना रहती है।

लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में दर्शकों की कम संख्या ने व्यापारियों की उम्मीदों को प्रभावित किया है।

यदि आने वाले दिनों में भी यही स्थिति बनी रहती है, तो स्टॉल संचालकों के लिए खर्च निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कम भीड़ के पीछे क्या हैं कारण?

सूरजकुंड दिवाली मेले में दर्शकों की कम संख्या के पीछे वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।

यह जांच का विषय हो सकता है कि प्रचार-प्रसार, आयोजन की समय-सारिणी, प्रवेश व्यवस्था या अन्य परिस्थितियों का दर्शकों की संख्या पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनमें से किसी एक कारण को कम भीड़ के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

आयोजकों के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वे दर्शकों की प्रतिक्रिया और व्यापारियों की समस्याओं को समझें, ताकि शेष दिनों में आयोजन की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सके।

अब अंतिम दो दिनों पर टिकी व्यापारियों की उम्मीदें

23 अक्टूबर से शुरू हुआ सूरजकुंड दिवाली मेला 26 अक्टूबर तक चलेगा। ऐसे में अब व्यापारियों और हस्तशिल्पियों की उम्मीदें मेले के शेष दो दिनों पर टिकी हैं।

स्टॉल संचालक चाहते हैं कि आने वाले दिनों में अधिक संख्या में दर्शक पहुंचें और उनके उत्पादों की बिक्री बढ़े।

वहीं, जिन हस्तशिल्पियों के स्टॉल अभी तक तैयार नहीं हुए हैं, उनके लिए जल्द व्यवस्था होना महत्वपूर्ण है।

फिलहाल मेले के दूसरे दिन की स्थिति ने आयोजकों के सामने दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने की चुनौती खड़ी कर दी है।

अब देखना होगा कि अंतिम दो दिनों में सूरजकुंड दिवाली मेले की रौनक लौटती है या व्यापारियों को उम्मीद से कम कारोबार के साथ लौटना पड़ता है।

Next Story