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Kurukshetra: एसवाईएल पानी से दक्षिणी हरियाणा की सिंचाई होगी मजबूत

Admindelhi1
6 Jan 2026 3:20 PM IST
Kurukshetra: एसवाईएल पानी से दक्षिणी हरियाणा की सिंचाई होगी मजबूत
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कुरुक्षेत्र: सुप्रीम कोर्ट तक विवाद पहुंचने के बावजूद भले ही एसवाईएल को अभी तक पंजाब से पानी नहीं मिल पाया लेकिन अब यही नहर दक्षिणी हरियाणा और दिल्ली की प्यास बुझाने में कारगर साबित होगी। जरूरत पड़ने पर इसमें नरवाना ब्रांच नहर के साथ-साथ मारकंडा नदी का पानी भी छोड़ा जाएगा जिससे न केवल मारकंडा से आने वाली बाढ़ का खतरा टलेगा बल्कि नहर का सही प्रयोग भी हो सकेगा।

सिंचाई विभाग ने 10 हजार क्यूसेक पानी दक्षिणी हरियाणा की ओर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें एसवाईएल के जरिये 6500 क्यूसेक और नरवाना ब्रांच के जरिये 3500 क्यूसेक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए नहरों का पहली बार बड़े स्तर पर जीर्णेद्धार किया जा रहा है।

लंबे समय से सुध न लिए जाने के कारण अपना मूल आकार तक खो चुकी एसवाईएल के जिले की सीमा में ही किए जाने वाले जीर्णोद्धार पर 50 करोड़ का बजट खर्च होगा। इसका प्रस्ताव विभाग की प्रदेश तकनीकी टीम पास कर चुकी है और अब फाइनल मुहर मुख्यमंत्री की ओर से लगाए जाने का इंतजार है। जिले में एसवाईएल नहर की लंबाई करीब 35 किलोमीटर है।

25 के बजाय 15 फीट रह गई चौड़ाई

अनदेखी व लंबे समय तक मरम्मत न होने के कारण समय अनुसार एसवाईएल अपना आकार भी खो चुकी है। 25 फीट के बजाय महज 15 फीट ही अधिकतर जगह चौड़ाई रह गई है। यही नहीं कई-कई फीट तक गाद जम चुकी है और झाड़ियां ही नहीं, अनेक जगह इसमें उगे पौधे पेड़ बन चुके हैं। किनारे भी खस्ताहाल हो चुके हैं। ऐसे में इसकी क्षमता भी बेहद कम रह गई है जिसके कारण किसी आपात स्थिति में भी इसमें पानी छोड़े जाने से खतरा पैदा होने लगा है।

मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलते ही शुरू कर दी जाएगी प्रक्रिया : एक्सईएन

सिंचाई विभाग के एक्सईएन मुनीष बब्बर का कहना है कि एसवाईएल का जीर्णोद्धार बेहद जरूरी हो गया है। इसके कारण ही प्रस्ताव तैयार किया गया, जो स्टेट तकनीकी टीम पास भी कर चुकी है। अब मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलते ही टेंडर आदि की प्रक्रिया कर तत्काल काम भी शुरू करवा दिया जाएगा। जीर्णोद्धार के एसवाईएल के जरिये दक्षिणी हरियाणा तक 6500 क्यूसेक पानी पहुंचाया जा सकेगा। नरवाना ब्रांच नहर का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है जिसके जरिये भी 3500 क्यूसेक पानी दक्षिणी हरियाणा तक पहुंचने लगेगा। इस नहर में कई कार्य किए भी जा चुके हैं। उनका कहना है कि न केवल एसवाईएल के जीर्णोद्धार से मारकंडा का पानी दक्षिणी हरियाणा तक पहुंचाया जा सकेगा बल्कि मारकंडा की वजह से आने वाली बाढ़ से भी बचा जा सकेगा। इसके बाद नहर अपने मूल आकार में भी आ जाएगी।

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