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Haryana.हरियाणा: हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न प्रमुख वक्ताओं ने विधायकों को विधायी मामलों पर जानकारी दी। इनमें केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह तथा राज्यसभा और लोकसभा सचिवालयों के अतिरिक्त एवं संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए। ‘विधायी प्रक्रियाओं में मंत्रियों की भूमिका’ पर बोलते हुए खट्टर ने कहा कि बेहतर मंत्री बनने के लिए सदस्य को विधायी प्रक्रिया, नियमों और कानूनों के साथ-साथ अपने विभागों के अलावा अन्य विभागों के प्रमुख मुद्दों की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान उन्हें विधानसभा सत्रों के दौरान पूरी जानकारी के साथ सवालों का जवाब देने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा, “विधानसभा के माध्यम से नए कानून बनाने या मौजूदा कानूनों में संशोधन करने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मामलों में, मंत्री को संबंधित कानून के मसौदे का गहन अध्ययन करना चाहिए ताकि उसके उद्देश्यों और लक्ष्यों से अच्छी तरह परिचित हो सकें।”
गुजरात विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा बहस का नहीं, संवाद का मंच है। उन्होंने सदस्यों से सदन की मर्यादा के भीतर अपने विचार रखने तथा अन्य सदस्यों की बात धैर्यपूर्वक सुनने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विधायकों को तथ्यों के आधार पर बोलना चाहिए, क्योंकि तथ्यों द्वारा समर्थित बिंदुओं का अधिक महत्व होता है। उन्होंने विधायकों द्वारा प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के आलोक में स्वयं को तैयार करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित करने की हरियाणा विधानसभा की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा, जिससे उन्हें अपने विधायी कर्तव्यों को अधिक प्रभावी ढंग से निभाने में मदद मिलेगी। उन्होंने सदस्यों से प्रौद्योगिकी के माध्यम से जानकारी एकत्र करने तथा नए नियमों और कानूनों से अपडेट रहने के लिए समय आवंटित करने का आग्रह किया। उन्होंने विधायी कार्यों में विभिन्न समितियों के विशेष महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा विधायकों को इन समितियों में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सदस्यों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाने की सलाह दी, ताकि वे उन चिंताओं को संबोधित करके और उनका समाधान करके लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं को पूरा कर सकें।
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