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Jhajjar: खेतों की स्पेशल गिरदावरी के लिए बेरी हलके में मांग तेज

Admindelhi1
10 Aug 2025 1:03 PM IST
Jhajjar: खेतों की स्पेशल गिरदावरी के लिए बेरी हलके में मांग तेज
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झज्जर: बेरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता विक्रम कादयान ने सरकार से क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने, जल निकासी के लिए कारगर इंतजाम करवाने और फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाकर किसानों को 50 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है।

कांग्रेस नेता विक्रम कादयान ने कहा कि बेरी विधानसभा क्षेत्र में जलभराव के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है। रिहायशी क्षेत्रों से लेकर खेतों तक पानी भरा हुआ है। लेकिन सरकार द्वारा जल निकासी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि बेरी हलके को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए और स्पेशल गिरदावरी करवाते हुए किसानों को पचास हजार प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि दूबलधन, माजरा, अच्छेज, पहाड़ीपुर, गोधड़ी, सफीपुर, मलिकपुर, मांगावास, बेरी, वजीरपुर, धौड़, डीघल, खरहर, मातन, छारा व छुड़ानी आदि गांवों में सरकार जल्द पानी निकासी का प्रबंध करवाए।

उन्होंने कहा कि दूबलधन में दादरी-बेरी मार्ग पर कई फुट पानी भरा हुआ है। रिहायशी क्षेत्रों में भी जलभराव के कारण लोग परेशान है। वहीं माजरा गांव की हरिजन बस्तियों में पानी भरा हुआ है और श्रद्धा की धर्मशाला के पास के मौहल्ले में भरे गंदे पानी के काKरण बीमारियां फैलने का डर सताने लगा है।

इसके अलावा खेल स्टेडियम और जल घर भी ओवर फ्लो है। निकासी के लिए लगाए गए बिजली के मोटर पंप सही काम नहीं कर रहे। देवालय की निकासी पाइप जगह-जगह धंस गई है, वहीं कन्या स्कूल के पास निकासी पाइप रुकी पड़ी है। जिससे जल भराव विकराल रूप धारण करता जा रहा है। विक्रम ने कहा कि बेरी, दुजाना, छोछी, महराणा, मदाना व भापड़ौदा में जलभराव के कारण जन जीवन पूर्णतया प्रभावित है। जलभराव क्षेत्रों में अब तक बिजली पॉइंट नहीं बने हैं।

ड्रेनेज व पाइपलाइन में गाद जमी हुई है। पाइप लाइनों की सफाई तक नहीं हुई। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिसके कारण परेशानी आमजन और किसानों को हो रही है।

उन्होंने जल भराव की स्थिति पर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है और कहा है कि अगर प्रशासन और सरकार जल्द पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं करती है तो उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

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