हरियाणा

झज्जर हादसा: मौत की वजह अब भी रहस्य

Saba Naaz
20 July 2026 6:28 PM IST
झज्जर हादसा: मौत की वजह अब भी रहस्य
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हरियाणा: झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में रविवार रात एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां एक बछड़े को बचाने के प्रयास में चार लोगों की जान चली गई। गांव के बीचों-बीच स्थित करीब 150 साल पुराने और पिछले 50 वर्षों से बंद पड़े कुएं में बछड़ा गिर गया था। उसे बचाने के लिए एक के बाद एक चार युवक कुएं में उतर गए, लेकिन कुछ ही देर में सभी की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है।

घटना रविवार रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच की बताई जा रही है। मुनीमपुर गांव में चौपाल और मंदिर के पास बने पुराने कुएं के नजदीक कुछ ग्रामीण बैठे हुए थे। इसी दौरान एक बछड़ा अचानक भागते हुए आया और संतुलन बिगड़ने से सीधे कुएं में गिर गया। बछड़े को कुएं में गिरता देख वहां मौजूद ग्रामीणों ने उसे बचाने की कोशिश शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक युवक बछड़े को निकालने के लिए कुएं में उतरा। जब काफी देर तक उसकी कोई आवाज नहीं आई तो उसे बचाने के लिए दूसरा युवक भी कुएं में उतर गया। इसके बाद तीसरा और चौथा युवक भी मदद के लिए कुएं में चले गए। लेकिन कुछ ही समय में चारों युवक कुएं के अंदर ही बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई।

मृतकों की पहचान मुनीमपुर निवासी दलबीर पुत्र फूल सिंह, मोनू पुत्र राजबीर, नरेंद्र पुत्र सत्यवान और उत्तर प्रदेश निवासी श्रमिक रामू पुत्र रामदुलारे के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसे में बछड़े की भी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

हादसे की सबसे बड़ी गुत्थी यह बनी हुई है कि आखिर चारों युवकों की मौत किस वजह से हुई। आशंका जताई जा रही है कि कुएं में जहरीली गैस बनने के कारण दम घुटने से उनकी मौत हुई हो सकती है। वहीं, दूसरी संभावना यह भी जताई जा रही है कि कुएं में अधिक पानी होने के कारण युवक डूब गए हों। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

ग्रामीणों के अनुसार, यह कुआं करीब 150 साल पुराना है और पिछले लगभग 50 वर्षों से बंद पड़ा था। लंबे समय से बंद रहने के कारण कुएं के अंदर जहरीली गैस जमा होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे बंद कुओं में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों की मौजूदगी जानलेवा साबित हो सकती है।

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। रात के समय अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं। गांव वालों ने ट्रैक्टरों को चालू कर उनकी लाइटों से रोशनी की व्यवस्था की। इसके बाद फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं।

कुएं की हालत इतनी खराब थी कि बिना मुंडेर तोड़े अंदर जाना संभव नहीं था। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से कुएं की मुंडेर को तोड़ा गया। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चारों युवकों के शव बाहर निकाले गए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बादली विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुलदीप वत्स भी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य पूरा होने तक घटनास्थल पर मौजूद रहे। देर रात करीब 12 बजे पुलिस आयुक्त डॉ. राजश्री सिंह भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल जाकर भी अधिकारियों से घटना की जानकारी जुटाई।

फिलहाल पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के सही कारणों का पता लगाया जाएगा। इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और बंद पड़े कुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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