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Panipat पानीपत का हैंडलूम उद्योग US-इज़राइल-ईरान के बीच चल रहे टकराव की वजह से सप्लाई में आ रही रुकावटों और बढ़ती लागत के दबाव का सामना कर रहा है। इसी के चलते डाइंग यूनिट्स ने प्रोसेसिंग रेट 20-25% बढ़ाने और एक्सपोर्टर्स व घरेलू मैन्युफैक्चरर्स पर अतिरिक्त चार्ज लगाने का फैसला किया है। यह फैसला हाल ही में पानीपत डायर्स एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। रेट बढ़ाने के अलावा, डायर्स ने 2 रुपये प्रति किलोग्राम का कार्ट्रिज चार्ज और 3 रुपये प्रति किलोग्राम का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) चार्ज लगाने का भी फैसला किया है, जिससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर बोझ और बढ़ गया है।
पानीपत, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'हैंडलूम सिटी' के तौर पर जाना जाता है, डाइंग को अपनी टेक्सटाइल और हैंडलूम मैन्युफैक्चरिंग चेन का एक अहम हिस्सा मानता है। राज्य सरकार ने शहर में बिखरी हुई डाइंग यूनिट्स को एक जगह लाने के लिए 2003 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के ज़रिए सेक्टर 29, पार्ट II विकसित किया था। इस सेक्टर में अभी 350 से ज़्यादा यूनिट्स चल रही हैं, जहाँ डाइंग के लिए नहर का पानी सप्लाई किया जाता है। हालाँकि, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई में रुकावटों और केमिकल व रंगों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने इस इंडस्ट्री पर बुरा असर डाला है।
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नितिन अरोड़ा ने कहा कि गैस की कमी और बढ़ती इनपुट लागत ने डाइंग के कामकाज पर बहुत बुरा असर डाला है। उन्होंने बताया कि 150 से ज़्यादा यूनिट्स LPG पर निर्भर हैं, जबकि लगभग 150 यूनिट्स PNG का इस्तेमाल करती हैं। गैस सप्लायर्स ने सप्लाई को सामान्य ज़रूरत के 60% तक सीमित कर दिया है। अरोड़ा ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत, रोज़ाना 100 किलोग्राम PNG इस्तेमाल करने वाली यूनिट सामान्य रेट पर सिर्फ़ 60 किलोग्राम गैस ही ले सकती है, जबकि बाकी 40 किलोग्राम पर 25% अतिरिक्त चार्ज लगता है।
उन्होंने आगे कहा कि केमिकल और रंग, जिनमें से कई पेट्रोलियम-आधारित हैं और खाड़ी देशों व दूसरे राज्यों से मंगाए जाते हैं, टकराव के कारण 40-45% महंगे हो गए हैं। अरोड़ा ने बताया कि एसोसिएशन ने शहर के एक्सपोर्टर्स और घरेलू उद्योगपतियों को अपने फैसले के बारे में बता दिया है। इस बीच, नाम न बताने की शर्त पर एक उद्योगपति ने आरोप लगाया कि ड्रेन नंबर 1 और ड्रेन नंबर 2 के किनारे 80 से ज़्यादा अवैध डाइंग यूनिट चल रही थीं। आरोप है कि ये यूनिट बिना सही मंज़ूरी के चल रही थीं और कम रेट पर काम करती थीं।
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