
एनआईटी फरीदाबाद के विधायक नीरज शर्मा ने 200 करोड़ के घोटाले में कड़ी कार्रवाई न होने पर विधानसभा के बीते बजट सत्र में सिले हुए वस्त्र त्याग दिए थे। छह माह तक वह धोती-चादर में ही रहे।
फरीदाबाद नगर निगम में हुए 200 करोड़ के घोटाले में निगमायुक्त रह चुके आईएएस अफसरों से भी पूछताछ होगी। मनोहर लाल सरकार ने राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) को नियम-17ए के तहत कार्रवाई की अनुमति दे दी है। राशि का भुगतान करने वाली दो महिला आईएएस समेत उन सभी आईएएस अफसरों को जांच की आंच झेलनी होगी जिन्होंने वर्क ऑर्डर जारी करने के बाद संशोधित और पुन संशोधित किए।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ ही घोटाले को विधानसभा में जोरशोर से उठाने वाले फरीदाबाद एनआईटी से कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। विजिलेंस ने सरकार से बीते महीने आईएएस से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी। उसके बाद मुख्य सचिव कार्यालय ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग से काम किए बिना राशि जारी करने का का ब्योरा मांगा।
राशि का भुगतान करने वाली दोनों आईएएस बीते दिनों सिविल सचिवालय में उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रख चुकी हैं। उनके तर्कों के बाद ही सरकार ने वर्क ऑर्डर जारी करने और उनमें बार-बार संशोधन करने वाले आईएएस अफसरों को भी जांच में शामिल करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव कार्यालय पहले ही शहरी निकाय विभाग से यह जान चुका है कि किस अधिकारी ने कितनी राशि बिना काम हुए ही जारी कर दी। विजिलेंस इस घोटाले में यह जांच कर रही है कि अफसरों ने बिना काम के ही राशि कैसे जारी कर दी। आईएएस अधिकारियों ने उसका सत्यापन क्यों नहीं किया।
दो मुख्य अभियंता, एक ठेकेदार जेल में
2020 में घोटाला उजागर होने के बाद दो मुख्य अभियंताओं और एक ठेकेदार को जेल भेजा जा चुका है। अनेक अफसर निलंबित किए गए हैं। घोटाले में अफसरों से लेकर नेता शामिल होने के कारण मामला पहले दबा रहा। निगम के वार्ड-14 में इंटरलॉकिंग टाइल लगाने के लिए नवंबर 2017 में 55.22 लाख और फिर कुछ समय बाद 99 लाख कर दिया। 30 अक्तूबर 2018 को इसे बढ़ाकर 1.97 करोड़ किया गया।
इसकी फाइल मंजूरी के लिए वित्त संविदा समिति को भी नहीं भेजी गई। इस तरह के ही अनेक मामले हैं, जिनमें बिना काम के ही भुगतान हुआ है। इस मामले में फंस रही एक महिला आईएएस हरियाणा में प्रतिनियुक्ति का समय पूरा कर अपने मूल कैडर में लौट चुकी हैं, दूसरी हरियाणा कैडर की होने के कारण यहीं सेवारत हैं। वर्क ऑर्डर जारी करने वाले आईएएस अफसरों पर पहले भी कई मामलों में अंगूलियां उठ चुकी हैं।
नीरज शर्मा ने छह माह नहीं पहले सिले वस्त्र
एनआईटी फरीदाबाद के विधायक नीरज शर्मा ने 200 करोड़ के घोटाले में कड़ी कार्रवाई न होने पर विधानसभा के बीते बजट सत्र में सिले हुए वस्त्र त्याग दिए थे। छह माह तक वह धोती-चादर में ही रहे। अभियंताओं, ठेकेदार की गिरफ्तारी और अफसरों के निलंबन के बाद बीते दिनों उन्होंने वस्त्र धारण किए थे। उनके इस कदम के बाद सरकार ने घोटाले की जांच विजिलेंस को सौंपी थी। नीरज इस मामले में संलिप्त अफसरों के नाम विधानसभा में ले चुके हैं।