
चंडीगढ़। हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवरों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, आयुष चिकित्सकों, नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य पात्र स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) आईडी बनवाना अनिवार्य होगा। संबंधित व्यावसायिक काउंसिलों में नए पंजीकरण और पुराने पंजीकरण के नवीनीकरण के दौरान HPR आईडी देना जरूरी रहेगा। राज्य सरकार ने यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, योग्य चिकित्साकर्मियों की पहचान सुनिश्चित करने और सभी पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवरों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से उठाया है।
हरियाणा सरकार की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह नई व्यवस्था आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत लागू की जा रही है। राज्य की स्वास्थ्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, इस पहल से स्वास्थ्य पेशेवरों की पहचान और उनकी योग्यता का सत्यापन आसान होगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को प्रदेश में उपलब्ध चिकित्सकीय मानव संसाधन की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी। अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के एक महीने बाद प्रभावी होगी।
किन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जरूरी होगी HPR ID?
नई व्यवस्था का दायरा केवल एलोपैथिक डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न पेशेवर शामिल होंगे। इनमें प्रमुख रूप से डॉक्टर, दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, नर्स, फार्मासिस्ट और पात्र पैरामेडिकल एवं एलाइड हेल्थकेयर पेशेवर शामिल हैं।
इसके अलावा सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM), जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM), बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग से जुड़े पात्र पेशेवरों को भी इस व्यवस्था के दायरे में रखा गया है।
इन सभी पात्र स्वास्थ्यकर्मियों को संबंधित काउंसिल में नए पंजीकरण या नवीनीकरण के समय अपनी HPR आईडी उपलब्ध करानी होगी। इसका मतलब है कि अब केवल शैक्षणिक योग्यता और पुराने पंजीकरण दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, बल्कि डिजिटल रजिस्ट्री में पहचान भी जरूरी होगी।
राज्य की पांच काउंसिलों में लागू होगा नया नियम
हरियाणा सरकार की अधिसूचना के अनुसार, HPR आईडी की अनिवार्यता राज्य की पांच प्रमुख व्यावसायिक काउंसिलों की पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल की जाएगी।
इनमें हरियाणा स्टेट मेडिकल काउंसिल, हरियाणा स्टेट डेंटल काउंसिल, हरियाणा नर्सेज एंड नर्स-मिडवाइव्स काउंसिल, काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन हरियाणा और हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल शामिल हैं।
इन संस्थाओं के माध्यम से डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, आयुष चिकित्सकों, नर्सों और फार्मासिस्टों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण किया जाता है। अब संबंधित पेशेवरों को अपनी सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया के साथ HPR आईडी की औपचारिकता भी पूरी करनी होगी।
प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन वालों को मिलेंगे 90 दिन
सरकार ने उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है, जिन्हें शुरुआत में प्रोविजनल यानी अस्थायी पंजीकरण दिया जाएगा। ऐसे पेशेवरों को अपनी HPR आईडी प्राप्त करने के लिए 90 दिनों का समय मिलेगा।
यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी निर्धारित 90 दिनों के भीतर HPR आईडी प्राप्त नहीं करता है, तो उसका प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन निलंबित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति का पेशेवर कामकाज भी प्रभावित होगा। रजिस्ट्रेशन दोबारा बहाल कराने के लिए HPR प्रक्रिया पूरी करना और संबंधित काउंसिल में आवेदन करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित काउंसिलों को यह भी निर्देश दिया है कि 90 दिनों की अवधि के दौरान ऐसे पेशेवरों को ईमेल और SMS के माध्यम से कम से कम तीन बार रिमाइंडर भेजे जाएं, ताकि उन्हें समयसीमा की जानकारी मिलती रहे।
प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन निलंबित होने के बाद HPR आईडी प्राप्त करने वाले पेशेवर को 10 दिनों के भीतर बहाली के लिए आवेदन करना होगा। संबंधित काउंसिल के सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद ही उनका पंजीकरण बहाल किया जा सकेगा।
पहले से पंजीकृत स्वास्थ्यकर्मियों को भी मिलेगी राहत
नई व्यवस्था लागू करते समय पहले से पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए भी संक्रमणकालीन अवधि का प्रावधान किया गया है। जिन लोगों का पंजीकरण या नवीनीकरण अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर होना निर्धारित है, उन्हें एक बार के लिए अतिरिक्त 30 दिनों की राहत दी जाएगी।
इसके अलावा संबंधित काउंसिलों और विभागों को निर्देश दिया गया है कि संपूर्ण और वैध ऑनलाइन आवेदन तथा आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद HPR और पेशेवर पंजीकरण का सत्यापन निर्धारित 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।
इससे स्वास्थ्यकर्मियों को अनावश्यक देरी से बचाने और पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री?
हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री यानी HPR आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत विकसित डिजिटल व्यवस्था है। इसका उद्देश्य देशभर के योग्य और पंजीकृत डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों का एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
इस रजिस्ट्री में स्वास्थ्य पेशेवरों की पहचान, शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर पंजीकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे अधिकृत संस्थानों को संबंधित व्यक्ति की पेशेवर पहचान और योग्यता का सत्यापन करने में सुविधा मिलती है।
HPR के माध्यम से सरकार को यह जानने में भी मदद मिल सकती है कि प्रदेश में कितने पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर उपलब्ध हैं और उनकी सेवाएं किन क्षेत्रों में मिल रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने, कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन करने और जरूरत के अनुसार मानव संसाधन के बेहतर वितरण में सहायता मिल सकती है।
ABHA और HPR ID में क्या है अंतर?
HPR और ABHA दोनों आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अलग-अलग है।
ABHA यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट नागरिकों और मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने के लिए बनाया गया है। वहीं HPR स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले योग्य पेशेवरों की पहचान और उनके पंजीकरण से संबंधित है।
इस प्रकार ABHA मरीजों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़ा है, जबकि HPR डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की पेशेवर पहचान का माध्यम है।
स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ेगी पारदर्शिता
हरियाणा सरकार का मानना है कि HPR आईडी अनिवार्य होने से स्वास्थ्य क्षेत्र में फर्जी पहचान और अप्रमाणित पेशेवरों से जुड़ी समस्याओं पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से संबंधित काउंसिलों को योग्य पेशेवरों की जानकारी एक ही व्यवस्था में उपलब्ध हो सकेगी।
फिलहाल राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। राजपत्र में प्रकाशन के एक महीने बाद नई व्यवस्था प्रभावी होगी। ऐसे में डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य पात्र स्वास्थ्यकर्मियों को समय रहते अपनी HPR आईडी बनवाने की तैयारी करनी चाहिए, ताकि नए पंजीकरण और नवीनीकरण के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।





