हरियाणा

NIT-Kurukshetra में आत्महत्याओं ने अकादमिक समुदाय में कैसे सदमे की लहर पैदा कर दी

Kiran
12 April 2026 8:18 AM IST
NIT-Kurukshetra में आत्महत्याओं ने अकादमिक समुदाय में कैसे सदमे की लहर पैदा कर दी
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NIT-Kurukshetra एनआईटी-कुरुक्षेत्र में 8 दिनों के भीतर दो छात्रों की आत्महत्या और तीन महीने में तीसरी मौत ने पूरे शैक्षणिक समुदाय में गहरा सदमा और डर पैदा कर दिया है। इन घटनाओं ने हॉस्टल लाइफ में तनाव, मानसिक स्वास्थ्य (mental health), और छात्रों पर अकादमिक दबाव को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है, जिससे संस्थान को मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करने और सुरक्षा बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है।

सदमे की लहर और प्रमुख चिंताएं:

लगातार नामांकन: 22 वर्षीय सिविल इंजीनियरिंग छात्र प्रियांशु (सिरसा) ने हॉस्टल नंबर 8 के कमरा नंबर 352 में फंदा लगाकर जान दी। इससे पहले, 2 अप्रैल को पवन कुमार (नूह) ने इसी हॉस्टल में खुदकुशी की थी।

मानसिक स्वास्थ्य संकट: इन घटनाओं ने छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव और एकाकीपन पर चिंता बढ़ा दी है।

सैद्धांतिक दबाव: छात्रों के बीच चल रही चर्चाओं में परीक्षाओं, प्रोफेसरों और प्रोफेसरों के व्यवहार को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। एडमिनिस्ट्रेशन हलचल: ट्रिब्यून इंडिया के अनुसार, संस्थान ने 20-25 छात्रों के ग्रुप पर एक फैकल्टी मेंटर नियुक्त करने का फैसला लिया है।

संस्थान द्वारा की जा रही कार्रवाई:

प्रत्येक 20-25 छात्रों के लिए एक मेंटल मेंटर नियुक्त किया जा रहा है।

होस्टल-बेस्ड तनाव प्रबंधन और खेल गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं।

सीसीटीवी कैमरे और ग्रिल जैसी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा है।

छात्रों की मानसिक स्थिति पर नजर रखने के लिए वार्डन को रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है

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