
करनाल Karnal: करनाल में सरकारी सप्लाई फेल (डिफॉल्ट) और कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी न करने के बावजूद कई राइस मिल मालिक काम जारी रखे हुए हैं। जांच और बचे हुए विवरणों के अनुसार, यह मुख्य रूप से एडमिनिस्ट्रेशन ढिलाई, भ्रष्टाचार और कानूनी कार्रवाइयों के गठजोड़ के कारण संभव हो पा रहा है। करनाल में राइस मिलों का काम जारी रहने के मुख्य कारण:
संपत्तियों की नीलामी में विफलता: जो मिल मालिक चावल लौटाने में बकाया (चूक) करते हैं, उनके खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई होती है। लेकिन, जिला प्रशासन समय पर इन देनदारियों को नीलाम करने में विफल रहा है। मिलीभगत और सरकारी ढिलाई: विवरणों में कहा गया है कि बकाया करने वाली मिलों को भी नई धान आवंटन कर दी जाती है। इससे पता चलता है कि अधिकारी और मिल मालिक के बीच मिलीभगत हो सकती है, जिससे वे नियमों को ताक पर रखकर ऑपरेशन जारी रखते हैं।
फर्जी नाम और पते: कई मामलों में, जिन मिलों को बकाया घोषित किया गया था, उन्होंने नाम बदलकर या नई फर्म बनाकर उसी स्थान पर काम करना जारी रखा। लीज पर मिलें चलाना: कई मिल मालिक अपनी मिलें लीज पर ले लेते हैं और पट्टे करने के बाद, वे उस स्थान को खाली कर देते हैं, जिससे विभाग के लिए वसूली करना मुश्किल हो जाता है। निजी धान (प्राइवेट धान) का वसूली: सरकारी सप्लाई में कमी के बावजूद, ये मिलें निजी किसान या मज़दूरों से धान खरीदकर, या बासमती चावल का वसूली (प्रोसेसिंग) करके अपना काम जारी रखते हैं।
कानूनी पेचीदगियां: जब प्रशासन कार्रवाई शुरू करता है, तो मिल मालिक अक्सर अदालतों से राहत ले लेते हैं, जिससे उन्हें काम करने का मौका मिल जाता है।
मामले का संदर्भ:
करनाल में 2013-14 से 2024-25 के बीच 58 से ज़्यादा पट्टे मिलों द्वारा लगभग ₹520 करोड़ का सरकारी चावल न लौटाने का मामला सामने आया है, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी जांच शुरू की है।





