हरियाणा

तेज बारिश से अस्पताल परिसर जलमग्न, मोर्चरी तक पहुंचना मुश्किल

Kavita2
8 Aug 2026 3:12 PM IST
तेज बारिश से अस्पताल परिसर जलमग्न, मोर्चरी तक पहुंचना मुश्किल
x

हरियाणा : शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर के सामान्य अस्पताल परिसर में भी जलभराव की समस्या सामने आई। अस्पताल का मुख्य गेट हो या मोर्चरी के सामने का हिस्सा, कई जगहों पर बारिश का पानी जमा हो गया। हालात ऐसे रहे कि मृतकों के स्वजनों को मोर्चरी तक पहुंचने के लिए पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जलनिकासी की व्यवस्था प्रभावित होने से मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल आने वाले अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

तेज बारिश के बाद अस्पताल परिसर में जगह-जगह पानी जमा होने लगा। कुछ ही देर में मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर मोर्चरी के आसपास का क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ गया। अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हुई, जिनके परिजन मोर्चरी में रखे गए थे और जिन्हें जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए वहां पहुंचना था।

मुख्य गेट से मोर्चरी तक पानी

बारिश के बाद अस्पताल के मुख्य गेट के आसपास काफी मात्रा में पानी जमा हो गया। इसके बाद मोर्चरी के सामने भी जलभराव हो गया। दोनों स्थानों के बीच आने-जाने वाले लोगों को पानी के बीच से रास्ता बनाकर गुजरना पड़ा।

अस्पताल परिसर में आमतौर पर मरीजों और उनके स्वजनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में जलभराव के कारण पैदल चलने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। कई लोगों को अपने कपड़े और सामान संभालते हुए पानी पार करना पड़ा।

मोर्चरी के सामने जलभराव की स्थिति और भी संवेदनशील रही, क्योंकि यहां मृतकों के परिजन अंतिम प्रक्रिया से जुड़े काम के लिए पहुंचते हैं। दुख की घड़ी में पहले से परेशान परिवारों को बारिश और जलभराव की अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ी।

जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

अस्पताल परिसर में बारिश के बाद जलभराव होने से जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि सामान्य बारिश के दौरान भी यदि अस्पताल परिसर में पानी जमा हो जाता है तो तेज बारिश की स्थिति में समस्या और गंभीर हो सकती है।

अस्पताल में जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, क्योंकि यहां मरीजों के साथ-साथ एंबुलेंस, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की लगातार आवाजाही रहती है। परिसर में पानी जमा रहने से न केवल आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि फिसलने और संक्रमण जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

मरीजों और तीमारदारों को भी परेशानी

जलभराव का असर केवल मोर्चरी तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को पानी से बचते हुए अस्पताल के भीतर पहुंचना पड़ा।

अस्पताल में बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गंभीर रूप से बीमार मरीज भी आते हैं। ऐसे लोगों के लिए जलभराव वाली जगह से गुजरना मुश्किल हो सकता है। यदि किसी मरीज को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से ले जाना हो तो समस्या और बढ़ जाती है।

एंबुलेंस और अन्य वाहनों की आवाजाही के लिए भी साफ रास्ता होना जरूरी है। परिसर में पानी जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है।

बारिश ने व्यवस्थाओं की खोली पोल

मानसून के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलभराव की शिकायतें सामने आती हैं। लेकिन अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान में बारिश का पानी जमा होना व्यवस्थाओं की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।

लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की नियमित सफाई और निगरानी की जानी चाहिए। नालियों में कचरा जमा होने या पानी की निकासी का रास्ता बाधित होने की स्थिति में बारिश का पानी परिसर में ही जमा हो सकता है।

यदि समय रहते नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई कराई जाए तो जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मृतकों के स्वजनों की बढ़ी परेशानी

मोर्चरी के सामने पानी जमा होने से मृतकों के स्वजनों की परेशानी विशेष रूप से बढ़ गई। परिजनों को शोक की स्थिति में अस्पताल की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मोर्चरी तक जाना था, लेकिन रास्ते में जमा पानी ने मुश्किल पैदा कर दी।

पानी के बीच से गुजरने के दौरान कपड़ों और जरूरी सामान के भीगने का डर बना रहा। कई लोगों को संभलकर कदम रखना पड़ा, ताकि वे फिसलकर गिर न जाएं।

लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को मोर्चरी जैसे संवेदनशील हिस्से तक जाने वाले रास्ते को जलभराव से मुक्त रखने के लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।

स्थायी समाधान की जरूरत

बारिश के बाद पानी की निकासी हो जाने से तत्काल समस्या खत्म हो सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए अस्पताल परिसर के ड्रेनेज सिस्टम की जांच जरूरी है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि पानी किन स्थानों पर सबसे ज्यादा जमा होता है और उसकी निकासी में कहां बाधा आ रही है।

जरूरत पड़ने पर नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्गों की मरम्मत और अतिरिक्त ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जा सकती है। अस्पताल परिसर की सड़क और निचले हिस्सों का भी तकनीकी निरीक्षण कराया जाना उपयोगी होगा।

संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान जरूरी

सामान्य अस्पताल शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर को जलभराव से मुक्त रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।

शनिवार की तेज बारिश ने अस्पताल परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की कमियों को सामने ला दिया। मुख्य गेट से मोर्चरी तक पानी जमा होने के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और अस्पताल प्रशासन जलभराव के कारणों की समीक्षा करें और मानसून के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए प्रभावी कदम उठाएं।

Next Story