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स्कूल में 6 साल की बच्ची पर टूटा कहर, बेहोश होने के बाद भी हमला करता रहा तीसरी का छात्र

Kavita2
31 Oct 2026 2:57 PM IST
स्कूल में 6 साल की बच्ची पर टूटा कहर, बेहोश होने के बाद भी हमला करता रहा तीसरी का छात्र
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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला से स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। सेक्टर-20 स्थित संस्कृति मॉडल स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर छह साल की KG छात्रा पर पत्थरों और गमले से हमला कर दिया। हमले में बच्ची के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गई। आरोप है कि बच्ची के बेहोश होने के बाद भी छात्र ने उसे मारना जारी रखा और बाल पकड़कर स्कूल परिसर में घसीटा। घटना 28 अक्टूबर की बताई जा रही है, जबकि इसका CCTV फुटेज और पूरा मामला 31 अक्टूबर को सामने आया। शुरुआत में बच्ची की हालत बेहद नाजुक बताई गई थी। बाद की रिपोर्टों के अनुसार, उसका उपचार चंडीगढ़ स्थित PGI में चल रहा है और उसकी स्थिति अब स्थिर बताई गई है।

खाली क्लासरूम में ले जाकर किया हमला

जानकारी के अनुसार, घटना स्कूल परिसर में हुई। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने कथित तौर पर KG की बच्ची को बहाने से स्कूल की पहली मंजिल पर बुलाया। परिवार के आरोपों के मुताबिक, उसने बच्ची से कहा था कि उसके पिता उसे बुला रहे हैं। इसके बाद वह उसे एक खाली कक्षा में ले गया।

CCTV फुटेज में छात्र बच्ची को कक्षा के अंदर ले जाते और उसके साथ मारपीट करते दिखाई देता है। शुरुआत में उसने बच्ची पर पत्थरों से हमला किया। इसके बाद वहां रखा गमला उठाकर उसके सिर पर मार दिया। हमले के दौरान बच्ची को कई बार चोटें आईं और वह जमीन पर गिर गई।

बताया जा रहा है कि छात्र ने बच्ची का सिर बेंच और जमीन पर पटका। इसके बाद भी वह नहीं रुका और उसे लात मारने तथा पत्थरों से हमला करने का सिलसिला जारी रखा।

बेहोश होने के बाद भी नहीं रुका हमला

इस घटना की सबसे चिंताजनक बात यह है कि बच्ची के बेहोश हो जाने के बाद भी छात्र कथित तौर पर उसे घसीटता रहा और उस पर हमला करता रहा। CCTV फुटेज में दिखाई देने वाली घटनाओं ने स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, करीब डेढ़ मिनट तक चली इस घटना के बाद छात्र वहां से चला गया। बच्ची घायल अवस्था में कक्षा में पड़ी रही। उसके शरीर और सिर पर कई चोटें आई थीं।

घटना के बाद स्कूल पहुंचने वाले परिजनों को भी पहले पूरी जानकारी नहीं थी कि बच्ची के साथ वास्तव में क्या हुआ। बताया गया है कि बाद में हमला करने वाले छात्र ने ही परिवार के सदस्यों को उस स्थान तक पहुंचाया, जहां बच्ची घायल और बेहोश पड़ी थी।

पहले सेक्टर-6 अस्पताल फिर PGI चंडीगढ़ रेफर

बच्ची को घायल अवस्था में देखकर परिवार के लोग घबरा गए। उन्होंने तत्काल उसे पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन सिर में गंभीर चोटों और उसकी हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) रेफर कर दिया गया।

शुरुआती रिपोर्टों में बच्ची की स्थिति गंभीर और नाजुक बताई गई थी। हालांकि, 31 अक्टूबर की दोपहर प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उसकी हालत स्थिर होने की जानकारी दी गई। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।

परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

घटना सामने आने के बाद बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि स्कूल परिसर में CCTV कैमरे लगे हुए थे और उनकी निगरानी प्रिंसिपल कार्यालय से किए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद इतनी देर तक बच्ची पर हमला होता रहा और किसी कर्मचारी को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब बच्ची स्कूल में मौजूद थी, तब उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। स्कूल में छोटे बच्चों की देखरेख के लिए पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी मौजूद थे या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

परिवार के एक सदस्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसी घटनाएं अभिभावकों का स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर कर सकती हैं। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की निगरानी के लिए विशेष इंतजाम होने चाहिए।

पुलिस ने स्कूल प्रबंधन और छात्र के माता-पिता से की पूछताछ

घटना की जानकारी मिलने के बाद सेक्टर-20 थाना प्रभारी यशदीप और जांच अधिकारी प्रदीप कुमार पुलिस टीम के साथ स्कूल पहुंचे। पुलिस ने CCTV फुटेज को जांच में शामिल किया है और घटना के क्रम को समझने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस स्कूल प्रबंधन से पूछताछ कर रही है कि घटना के समय दोनों बच्चे किस परिस्थिति में एक ही स्थान पर थे और वहां निगरानी की क्या व्यवस्था थी। इसके अलावा हमला करने वाले छात्र के माता-पिता से भी बातचीत की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर इतनी छोटी उम्र के बच्चे ने ऐसा व्यवहार क्यों किया और घटना से पहले दोनों बच्चों के बीच किसी तरह का विवाद हुआ था या नहीं। अभी तक हमले के पीछे का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

चूंकि दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए मामले में कार्रवाई किशोर न्याय से जुड़े कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। बच्ची के उपचार के साथ-साथ घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

पंचकूला की यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित सवाल नहीं उठाती, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में छोटे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचती है। स्कूलों में CCTV कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की नियमित निगरानी, कक्षाओं के बीच उचित व्यवस्था, शिक्षकों की उपलब्धता और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप भी जरूरी है।

विशेष रूप से नर्सरी, LKG और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को अतिरिक्त देखरेख की जरूरत होती है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि छोटे बच्चों को बिना निगरानी के सुनसान कमरों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर जाने से रोका जाए।

फिलहाल पंचकूला पुलिस मामले की जांच कर रही है और बच्ची का PGI चंडीगढ़ में उपचार जारी है। इस घटना ने अभिभावकों के मन में चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार और पुलिस जांच के निष्कर्षों पर है।

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