Hisar: विवेकानंद का सिद्धांत हमेशा राह दिखाएगा: प्रो. बिश्नोई

हिसार: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि स्वामी विवेकानंद व्यापक रूप से महानतम आधुनिक भारतीय विचारकों में से एक थे। स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध नारों में से एक है ‘उठो, जागो और तब तक रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’। स्वामी विवेकानंद जी का यह सिद्धांत युगों-युगों तक भारतीय जनमानस का मार्गदर्शन करता रहेगा।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई गुरुवार काे राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह के उपलक्ष्य पर विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय द्वारा विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण एवं उसके माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए स्वामी विवेकानंद साहित्य की पुस्तक प्रदर्शनी के अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और कार्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि एक महान मानव में करुणा, आशावाद, विश्वास, हास्य और सचेतनता की विशेषताएं होनी चाहिएं। स्वामी विवेकानंद ने भारत में आध्यात्मिक प्रशिक्षण के लिए एक मठवासी संघ, रामकृष्ण मठ, और सामाजिक सेवाओं, शिक्षा और मानवीय कार्यों के लिए समर्पित रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत के सबसे लोकप्रिय हिंदू संन्यासियों और आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे। उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता के एक बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था। उनके विचारों पर प्राचीन हिंदू दर्शन ‘विशेषकर वेदांत’ का गहरा प्रभाव स्पष्ट रूप से है।
कुलसचिव डा. विजय कुमार ने पुस्तकालयध्यक्ष डा. विनोद कुमार और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खासकर चैटजीपीटी और ओपन एआई के युग में इस तरह का साहित्य वास्तव में एक अनमोल खजाना है। स्वामी विवेकानंद ने 11 सितम्बर, 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था। उन्होंने बताया कि पवित्रता, धैर्य और दृढ़ता सभी बाधाओं को पार कर जाती है। उन्होंने साहस और निरंतर परिश्रम का सुझाव दिया। स्वामी विवेकानंद के अनुसार धैर्य और निरंतर परिश्रम ही सफलता पाने का एकमात्र मार्ग है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार ‘स्वयं पर विश्वास और ईश्वर पर विश्वास-यही महानता का रहस्य है। उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र कुमार ने आश्वासन दिया कि भविष्य में हम इस प्रकार की प्रदर्शनी आयोजित करने में अग्रणी रहेंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी रामकृष्ण मठ, पुणे के सहयोग से आयोजित की गई है। इस अवसर पर डॉ. श्याम सुन्दर जोशी, सोमदत्त और पूजा उपस्थित रहे।





