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Hisar: पंजाब के किसानों के लिए वरदान बनेगी धान की उन्नत किस्म एचकेआर-49

Admindelhi1
3 Jun 2026 11:27 AM IST
Hisar: पंजाब के किसानों के लिए वरदान बनेगी धान की उन्नत किस्म एचकेआर-49
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हिसार: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से विकसित किए जा रहे उन्नत किस्मों के बीज देश एवं प्रदेश के किसानों तक उपलब्ध करवाने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत समझौते किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा धान की उन्नत

किस्म एचकेआर-49 के लिए गर्ग सीड्स कॉरपोरेशन, लुधियाना के साथ गैर-अनन्य लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि धान की किस्म एचकेआर-49 अपनी उत्कृष्ट कृषि विशेषताओं एवं उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है।

इस कंपनी के साथ हुआ समझौता कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज की उपस्थिति में गर्ग सीड्स कॉरपोरेशन, लुधियाना के साथ समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग तथा कंपनी की ओर से सेल्स एंड मार्केंटिंग मैनेजर विकास बंसल ने हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय के साथ किसानों को भी होगा फायदा समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस की फीस अदा करेगी जिसके तहत उसे बीज का उत्पादन व विपणन करने का अधिकार प्राप्त होगा इसके बाद किसानों को भी इस उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध हो सकेगा।

धान की उन्नत किस्म एचकेआर-49 की खासियत यह अर्ध-बौनी शीघ्र पकने वाली तथा अधिक उपज देने वाली किस्म है। यह 120-125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके दाने अति उत्तम गुणवत्ता के हैं। यह किस्म फॉल्स स्मट, ब्राउन स्पॉट तथा लीफ फोल्डर के प्रति सहनशील है। यह बहुफसली खेती प्रणाली तथा कटाई उपरांत कार्यों के समयबद्ध प्रबंधन के लिए उपयुक्त है। सीधी बुवाई की परिस्थितियों में भी यह अच्छी उपज देती है। इसकी औसत उपज 32 क्विंटल प्रति एकड़ तथा संभावित उपज 35-37 क्विंटल प्रति एकड़ है। लंबे एवं पतले दानों वाली लंबी बालियां होती हैं।

इसके पौधे सीधे खड़े रहने वाले तथा गिरने के प्रति प्रतिरोधी हैं। फसल गिरने की समस्या नहीं होती। पकने पर दानों का झडऩा नहीं होता। जल्दी तथा देर से रोपाई, दोनों परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. पवन कुमार, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश कुमार, डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल व डॉ. जितेन्द्र भाटिया मौजूद रहे।

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