Hisar: आरएच-1975 से बढ़ेगी सरसों उत्पादन की उम्मीद, किसानों तक पहुंचेगी किस्म

हिसार: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने अपनी विकसित उन्नत सरसों किस्म ‘आरएच-1975’ को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने इस किस्म के बीज उत्पादन और वितरण के लिए केडीएम सीड्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, खांडवा के साथ लाइसेंस समझौता किया है।
इस समझौते से हरियाणा सहित उत्तर भारत के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक लगातार विभिन्न फसलों की उच्च उत्पादक और बेहतर गुणवत्ता वाली किस्में विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन किस्मों को किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है, ताकि किसान आधुनिक तकनीक और विश्वसनीय बीजों का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ा सकें। इससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आय भी बढ़ेगी।
सरसों की उन्नत किस्म ‘आरएच-1975’ के लिए हुए समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग और कंपनी की ओर से चेयरमैन सुभाष महता ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
किसानों के लिए क्यों खास है ‘आरएच-1975’
‘आरएच-1975’ सरसों की ऐसी उन्नत किस्म है, जिसकी औसत उत्पादन क्षमता 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है। अनुकूल परिस्थितियों में इसका उत्पादन 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है। इस किस्म में लगभग 39.5 प्रतिशत तेल पाया जाता है, जो इसे अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली किस्म बनाता है।
यह किस्म हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है। निजी कंपनी के साथ हुए समझौते के बाद इन राज्यों के किसानों को इस किस्म का प्रमाणित बीज अधिक मात्रा में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. रमेश यादव, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. वीरेंद्र मोर, डॉ. राम अवतार, डॉ. योगेश जिंदल तथा डॉ. पवन सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।





